गिरि-अश्वनी योजनाओं में बार-बार सिल्ट आने से सप्लाई प्रभावित, नगर निगम और जलशक्ति विभाग की बैठक में बनी रणनीति
सोलन। शहर में लगातार बनी हुई पेयजल किल्लत के बीच नगर निगम ने अब बोरवेल के माध्यम से वैकल्पिक जल स्रोत तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत वार्ड नंबर 16 में बोरवेल के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि अन्य वार्डों में भी पार्षदों के साथ मिलकर उपयुक्त स्थान चिन्हित किए जाएंगे।
बोरवेल से संबंधित वार्डों में छोटे पेयजल कनेक्शनों को आपात स्थिति में पानी उपलब्ध करवाने की योजना है। इसका उद्देश्य गिरि और अश्वनी पेयजल योजनाओं में सिल्ट आने के कारण सप्लाई बाधित होने की स्थिति में लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करवाना है।
पांच से छह दिन बाद भी नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी
शहर में पेयजल किल्लत को लेकर बुधवार को नगर निगम के पदाधिकारियों, अधिकारियों और जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता के बीच बैठक हुई। बैठक में महापौर सुषमा शर्मा सहित सभी पार्षद मौजूद रहे।
बैठक में पार्षदों ने शहर में जारी पेयजल संकट को लेकर चिंता जताई। वर्तमान में कई क्षेत्रों में लोगों को पांच से छह दिन बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जलशक्ति विभाग की ओर से बताया गया कि सामान्य परिस्थितियों में निगम को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है, लेकिन शिमला क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान गिरि और अश्वनी खड्ड में अत्यधिक सिल्ट आने से पेयजल योजनाओं से पानी उठाने और सप्लाई करने में दिक्कत होती है।
दो माह में पेयजल संकट दूर करने का दावा
बैठक में शहर की पेयजल समस्या से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर भी चर्चा हुई। नगर निगम की महापौर सुषमा शर्मा ने दावा किया कि दो माह के भीतर शहर में पेयजल किल्लत को पूरी तरह दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समस्या को आठ से दस दिन में कम करने का प्रयास किया जाएगा और लक्ष्य है कि लोगों को तीन से चार दिन के अंतराल पर पानी उपलब्ध करवाया जा सके।
एक साथ 20 से 25 कनेक्शनों को मिलेगा पानी
जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता ने बैठक में बताया कि गिरि और अश्वनी पेयजल योजनाओं के ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बड़ी मात्रा में सिल्ट जमा हो रही है। इसके चलते पानी लिफ्ट करने में परेशानी आती है।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में बोरवेल की मदद से वैकल्पिक जल स्रोत तैयार किए जाएंगे। इनसे एक समय में करीब 20 से 25 कनेक्शनों को पानी उपलब्ध करवाने की योजना है।
नगर निगम का मानना है कि बोरवेल तैयार होने के बाद बारिश के दौरान गिरि और अश्वनी योजनाओं में सिल्ट आने से सप्लाई प्रभावित होने पर इनका उपयोग वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर किया जा सकेगा।
अब देखना होगा कि कब तक सुधरती है व्यवस्था
शहर में लंबे समय से चल रही पेयजल किल्लत के बीच बोरवेल की योजना लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगा रही है। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बोरवेल कब तक तैयार होते हैं और तीन से चार दिन के अंतराल पर नियमित पेयजल आपूर्ति का लक्ष्य कब पूरा होता है।










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