हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने में अब केवल एक दिन शेष बचा है, ऐसे में हजारों संभावित उम्मीदवारों के सामने नए नियम बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। राज्य में अब तक 42,562 उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं, लेकिन कई दावेदार कानूनी प्रावधानों और नई शर्तों के कारण असमंजस में हैं कि वे चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं।
सरकार द्वारा हाल ही में पंचायत चुनाव नियमों में किए गए बदलावों ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। खास बात यह है कि अब केवल उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों की गतिविधियां भी चुनाव लड़ने की पात्रता तय करेंगी।
परिवार के अतिक्रमण का असर सीधे उम्मीदवारी पर
नए नियमों के अनुसार यदि उम्मीदवार के परिवार के किसी सदस्य ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है, तो संबंधित व्यक्ति चुनाव लड़ने से अयोग्य हो सकता है।
किन परिस्थितियों में कट सकती है उम्मीदवारी?
- पिता द्वारा अतिक्रमण होने पर बेटा चुनाव नहीं लड़ सकेगा
- दादा-दादी के अवैध कब्जे की स्थिति में पोता अयोग्य हो सकता है
- ससुर द्वारा अतिक्रमण होने पर बहू चुनाव नहीं लड़ पाएगी
- पति या पत्नी में से किसी एक के नाम अवैध कब्जा होने पर दोनों प्रभावित हो सकते हैं
- अविवाहित पुत्री के नाम कब्जा होने पर उसकी उम्मीदवारी भी रद्द हो सकती है
चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इन कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी नहीं है, जिसके कारण अंतिम समय में कई उम्मीदवार चुनावी रेस से बाहर हो सकते हैं।
जीत के बाद भी जा सकती है कुर्सी
यदि कोई उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है या उसके खिलाफ अतिक्रमण अथवा अन्य आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो उसकी सदस्यता और पद दोनों समाप्त किए जा सकते हैं। यही कारण है कि प्रशासन भी दस्तावेजों और पात्रता की गहन जांच में जुटा हुआ है।
कौन-कौन नहीं लड़ पाएगा चुनाव?
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि केवल साफ छवि और नियमों का पालन करने वाले ही चुनावी मैदान में उतरेंगे। निम्नलिखित लोग अयोग्य माने जाएंगे:
- भ्रष्टाचार के दोषी: चुनावी अनियमितता या भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति।
- डिफॉल्टर: को-ऑपरेटिव सोसायटी, पंचायत टैक्स या पंचायत निधि का भुगतान न करने वाले।
- रिकवरी: जिन पर पंचायत की कोई भी देनदारी (Recovery) लंबित है।
- लाभ का पद: सरकारी कर्मचारी या किसी लाभ के पद पर आसीन व्यक्ति।
- मानसिक स्थिति: अदालत द्वारा दिवालिया या मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित व्यक्ति।
आंकड़ों में समझें चुनावी दंगल
प्रदेश की 31,182 सीटों पर होने वाले इस महाकुंभ का गणित कुछ इस प्रकार है:
| पद का नाम | कुल सीटें |
|---|---|
| ग्राम पंचायत सदस्य | 21,654 |
| प्रधान | 3,754 |
| उप-प्रधान | 3,754 |
| पंचायत समिति सदस्य | 1,769 |
| जिला परिषद सदस्य | 251 |
उम्र और वोटर लिस्ट का पेंच
उम्मीदवार की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होनी अनिवार्य है। साथ ही, जिस वार्ड या क्षेत्र से उम्मीदवार चुनाव लड़ना चाहता है, वहां की मतदाता सूची में उसका नाम होना अनिवार्य है। यदि नाम लिस्ट में नहीं है, तो दावेदारी का कोई आधार नहीं बचेगा।
चुनावी मैदान में बढ़ी हलचल
नई शर्तों और कड़े नियमों के चलते पंचायत चुनाव इस बार पहले से अधिक दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं। कई जगहों पर उम्मीदवार दस्तावेजों की जांच और कानूनी सलाह लेने में जुटे हुए हैं ताकि अंतिम समय में उनकी उम्मीदवारी खतरे में न पड़े।
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रतन चंद जी नमस्कार🙏 'हिमालयन डान' के नए स्वरूप को सराहने और अपनी आत्मीय शुभकामनाएं भेजने के लिए हम आपका…