हिमाचल के बागवानों पर मौसम की दोहरी मार, इस बार 2.63 लाख मीट्रिक टन तक घट सकता है सेब उत्पादन

On: July 6, 2026 11:50 AM
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बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हिमाचल प्रदेश के सेब के बाग, घटते सेब उत्पादन से चिंतित बागवान
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बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से बागों को भारी नुकसान, बढ़ती लागत और घटती पैदावार ने बढ़ाई बागवानों की चिंता

शिमला। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब बागवानी इस वर्ष गंभीर चुनौती के दौर से गुजर रही है। बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और लगातार बदलते मौसम के कारण प्रदेश में सेब सहित गुठलीदार फलों की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इसका असर संभावित उत्पादन के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है।

बागवानी विभाग के शुरुआती अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रदेश का सेब उत्पादन करीब 4.36 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है। पिछले सीजन में यह उत्पादन 6.99 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया था।

यानी इस बार लगभग 2.63 लाख मीट्रिक टन कम सेब उत्पादन होने का अनुमान है। प्रदेश की करीब पांच हजार करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था के लिए यह गिरावट चिंता का विषय मानी जा रही है।

मौसम की मार ने बिगाड़ा पूरा सीजन
बागवानों का कहना है कि इस वर्ष मौसम ने शुरुआत से ही साथ नहीं दिया। फूल आने से लेकर फल बनने तक कई बार हुई बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने बागों को नुकसान पहुंचाया। इसका असर केवल सेब ही नहीं, बल्कि आड़ू, प्लम, खुबानी और अन्य गुठलीदार फलों की पैदावार पर भी पड़ा है।

बढ़ती लागत ने बढ़ाई मुश्किलें
एक ओर फसल कम हुई है, वहीं दूसरी ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। कीटनाशकों, फफूंदनाशकों, उर्वरकों और बागवानी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की कीमतों में वृद्धि से बागवानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। कम उत्पादन के कारण आय घटने की आशंका ने कई परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है।

सरकार से क्या चाहते हैं बागवान?
बागवानों ने सरकार से मांग की है कि हर बाग तक सिंचाई सुविधाएं पहुंचाई जाएं और फसल बीमा योजना की जानकारी गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था समय की जरूरत है।

लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी
हिमाचल प्रदेश को देश के प्रमुख फल उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। प्रदेश में लगभग 2.37 लाख हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न फलों की खेती की जाती है, जिनमें से लगभग 49 प्रतिशत क्षेत्र यानी करीब 1.16 लाख हेक्टेयर में सेब के बाग हैं। प्रदेश के लगभग 4.5 लाख बागवान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं।

जलवायु परिवर्तन बन रहा बड़ी चुनौती
बागवानी विभाग का मानना है कि बढ़ता वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन अब बागवानी क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। बदलते मौसम का असर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर पड़ रहा है।

बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार ने बताया कि विभाग बागवानों को उच्च घनत्व (हाई-डेंसिटी) बागवानी, बेहतर गुणवत्ता वाली पौध किस्मों को अपनाने और फसल बीमा कराने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

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