शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं के कमजोर परिणामों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2026 की दसवीं और बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणामों की समीक्षा शुरू करते हुए 25 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले 50 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
निदेशालय ने संबंधित शिक्षकों को 15 दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके विषय का परीक्षा परिणाम इतना कम क्यों रहा और इसके पीछे क्या कारण रहे। साथ ही भविष्य में परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी भी मांगी गई है।
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए शिक्षकों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कमजोर परीक्षा परिणाम वाले मामलों में स्पष्टीकरण लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में जिन स्कूलों या शिक्षकों का बोर्ड परीक्षा परिणाम अत्यंत कमजोर रहा है, उनसे जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि कमियों की पहचान कर भविष्य में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में प्रभावी सुधार किया जा सके।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से शिक्षकों में उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होगी और सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार लाने में मदद मिलेगी।









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