हिमाचल में अब किसानों-बागवानों के लिए ‘फार्मर आईडी’ अनिवार्य: बिना इसके नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ; जानें कैसे करें आवेदन

On: January 3, 2026 4:42 PM
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हिमाचल में अब किसानों-बागवानों के लिए 'फार्मर आईडी' अनिवार्य
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शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और सरकारी योजनाओं को सीधे किसानों तक पहुँचाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी किसानों और बागवानों के लिए अब ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। भारत सरकार की एग्रीस्टैक (AgriStack) परियोजना के तहत प्रदेश में ‘फार्मर रजिस्ट्री’ का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।

कृषि विभाग के प्रवक्ता ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस नई व्यवस्था से पात्र किसानों तक लाभ पहुँचाना आसान होगा और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।

क्यों जरूरी है फार्मर आईडी?

यह आईडी बन जाने के बाद किसान और बागवान केंद्र व राज्य सरकार की निम्नलिखित योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के उठा सकेंगे:

  • पीएम किसान सम्मान निधि योजना
  • बीज, उर्वरक और सिंचाई पर मिलने वाला अनुदान
  • प्राकृतिक खेती और बागवानी से जुड़ी योजनाएं
  • फसल बीमा और अन्य आपदा सहायता
घर बैठे खुद बना सकते हैं आईडी: जानें ऑनलाइन प्रक्रिया

सरकार ने पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित रखा है। किसान स्वयं भी अपना पंजीकरण कर सकते हैं:

  1. वेबसाइट: सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल hpfr.agristack.gov.in पर जाएं।
  2. यूजर अकाउंट: पोर्टल पर ‘Farmer’ विकल्प पर क्लिक करके अपना यूजर अकाउंट बनाएं।
  3. आधार e-KYC: आधार कार्ड के माध्यम से OTP आधारित प्रमाणीकरण (Authentication) पूरा करें।
  4. विवरण भरें: अपनी भूमि और कृषि से संबंधित जानकारी भरकर आवेदन जमा करें।
  5. सत्यापन: जानकारी के सफल सत्यापन के बाद आपकी यूनिक ‘फार्मर आईडी’ जारी कर दी जाएगी।
लोकमित्र केंद्रों पर मिलेगी ‘निःशुल्क’ सुविधा

जिन किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाई आ रही है, उनके लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। किसान अपने नजदीकी लोकमित्र केंद्र में जाकर मुफ्त (Free) में अपनी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। इसके अलावा, संबंधित ब्लॉक के कृषि या बागवानी अधिकारी से भी इस बारे में तकनीकी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

डिजिटल सशक्तिकरण की ओर कदम

कृषि विभाग के अनुसार, एग्रीस्टैक पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों का एक सटीक डेटाबेस तैयार करना है। प्रवक्ता ने सभी किसानों और बागवानों से अपील की है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण करवा लें, ताकि भविष्य में वे किसी भी अनुदान या सहायता से वंचित न रहें। यह पहल न केवल समय बचाएगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाएगी।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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