शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के अधिकारों और हितों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों में प्रभावी पैरवी कर हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि “मैं कभी भी प्रदेश हितों के साथ समझौता नहीं करूंगा।”
राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बीबीएमबी के वित्तीय बकाया, बिजली में हिमाचल के हिस्से, शानन जलविद्युत परियोजना, वाइल्ड फ्लावर हॉल, कड़छम-वांगतू और किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना जैसे महत्वपूर्ण मामलों में प्रदेश के हितों की प्रभावी पैरवी की जा रही है।
बीबीएमबी से 4,200 करोड़ रुपये और बिजली के अधिकार की मांग
मुख्यमंत्री लगातार विभिन्न मंचों पर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल प्रदेश के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के वित्तीय बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली पर प्रदेश के अधिकार की मजबूती से पैरवी कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद राज्य को अब तक उसका पूरा अधिकार नहीं मिल पाया है।
इसके अलावा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि एवं परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से की मांग भी सरकार प्रमुखता से उठा रही है।
शानन जलविद्युत परियोजना पर भी सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शानन जलविद्युत परियोजना भी शामिल है। परियोजना की लीज समाप्त होने के बावजूद पंजाब सरकार द्वारा इसे हिमाचल को वापस नहीं सौंपा गया है। यह मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में मिली बड़ी जीत
वर्ष 2002 से कानूनी विवाद में फंसे वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में राज्य सरकार ने प्रभावी पैरवी कर हिमाचल के पक्ष में फैसला हासिल किया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह संपत्ति दोबारा राज्य सरकार के नियंत्रण में आ गई। सरकार ने 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया और अब इस संपत्ति से प्रदेश को 20 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक राजस्व प्राप्त हो रहा है।
कड़छम-वांगतू परियोजना से बढ़ी मुफ्त बिजली
1,045 मेगावाट क्षमता की कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में भी राज्य सरकार को सफलता मिली है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद हिमाचल को मिलने वाली मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे राज्य को हर वर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
किशाऊ परियोजना में भी सुरक्षित किए प्रदेश के हित
करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में भी मुख्यमंत्री की पहल से प्रदेश के हितों की रक्षा हुई। पूर्व सरकार द्वारा 800 करोड़ रुपये स्वीकार करने की सहमति को वर्तमान सरकार ने अस्वीकार किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने जल घटक से लाभान्वित राज्यों द्वारा हिमाचल के हिस्से की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति दी।
परियोजना पूरी होने पर हिमाचल प्रदेश को लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसका अनुमानित वार्षिक मूल्य करीब 600 करोड़ रुपये होगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश और प्रदेशवासियों का हित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा वह कभी भी प्रदेश हितों से समझौता नहीं करेंगे।







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