सेब, टमाटर, मक्का और खीरे की फसलों को नुकसान का खतरा, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की जरूरी एडवाइजरी
सोलन (अक्षय) 30 जून। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी ताजा कृषि मौसम परामर्श में सोलन जिले के किसानों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है। आगामी 30 जून से 4 जुलाई तक जिले में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से फसलों में रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
टमाटर और सब्जियों के किसानों को विशेष सतर्क रहने की सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने बताया है कि तेज हवाओं से टमाटर सहित अन्य सब्जी फसलों के पौधे गिर सकते हैं, तने टूट सकते हैं तथा फूल और फल झड़ने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसानों को पौधों की स्टेकिंग (सहारा देना), खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने तथा निचली पत्तियां हटाने की सलाह दी गई है।
सेब उत्पादकों के लिए बड़ा अलर्ट
लगातार नमी और वर्षा के कारण सेब के बागानों में स्कैब और अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि फिलहाल कीटनाशकों का छिड़काव न करें, बल्कि निचली शाखाओं की छंटाई कर बागानों में हवा का बेहतर प्रवाह सुनिश्चित करें और जलभराव बिल्कुल न होने दें।
मक्का, खीरा और खुबानी उत्पादकों के लिए भी सलाह
मक्का की नई फसल को जलभराव से बचाने के लिए खेतों में निकासी व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया है। खीरा एवं अन्य लौकीवर्गीय फसलों में जड़ सड़न और रोगों से बचाव के लिए भी जल निकासी जरूरी बताई गई है। वहीं खुबानी के गिरे हुए फलों को कम से कम 45 सेंटीमीटर गहरे गड्ढे में दबाने की सलाह दी गई है ताकि रोग और कीटों का फैलाव रोका जा सके।
पशुपालकों के लिए भी जरूरी निर्देश
गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए पशुओं को खुले स्थान पर न बांधने, उन्हें शेड में रखने तथा पर्याप्त स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है।
कृषि वैज्ञानिकों की अपील
विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचें, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें तथा खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें। प्राकृतिक खेती करने वाले किसान साफ मौसम में अग्निअस्त्र, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क और जीवामृत का प्रयोग कर सकते हैं।
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