विनय कुमार का ‘मिशन मनरेगा’: क्या 8 जनवरी की मीटिंग बदल देगी प्रदेश की सियासी तस्वीर?

On: January 5, 2026 9:14 AM
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हिमाचल की राजनीति में 'विनय' का शंखनाद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति इस समय एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए एक ऐसा दांव खेला है जिसने युवाओं से लेकर बुजुर्गों और मजदूरों तक, हर वर्ग का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 8 जनवरी को शिमला के राजीव भवन में होने वाली जिलाध्यक्षों की बैठक मात्र एक राजनीतिक जमावड़ा नहीं, बल्कि आम आदमी के हक की लड़ाई का ‘ब्लूप्रिंट’ है।

विनय कुमार ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालते ही साबित कर दिया है कि वे केवल पद पर बैठने वाले नेता नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर मोर्चा संभालने वाले सेनापति हैं। हिमाचल प्रदेश की सियासत अब केवल विधानसभा के गलियारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘मनरेगा’ की कुदाल और फावड़े लेकर कांग्रेस अब सीधे गांव की पगडंडियों पर उतरने वाली है। केंद्र सरकार की मनरेगा विरोधी नीतियों के खिलाफ उन्होंने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का जो खाका खींचा है, उसने दिल्ली के गलियारों तक हलचल पैदा कर दी है।

क्यों हर वर्ग के लिए खास है यह अभियान?

  • मजदूरों के लिए: यह उनकी रोजी-रोटी और महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी अस्मिता की लड़ाई है। विनय कुमार ने साफ कर दिया है कि वह गांव के आखिरी व्यक्ति के हक के लिए केंद्र से टकराने को तैयार हैं।
  • युवाओं के लिए: विनय कुमार ने संगठन में नए और ऊर्जावान जिलाध्यक्षों को शामिल कर यह संदेश दिया है कि अब राजनीति में युवाओं की भागीदारी और जवाबदेही तय होगी।
  • मध्यम वर्ग के लिए: यह अभियान केंद्र की नीतियों और उनके असर पर एक बड़ी बहस छेड़ रहा है, जिससे जागरूक नागरिक खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।

47 डेज मास्टरप्लान: एक नजर में

विनय कुमार ने इस आंदोलन को किसी उत्सव की तरह नहीं, बल्कि एक मिशन की तरह डिजाइन किया है:

  1. रणभेरी (8 जनवरी): शिमला में जिलाध्यक्षों को ‘जीत का मंत्र’ देंगे विनय कुमार।
  2. सत्य का साथ (10-11 जनवरी): प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे, फिर एक दिन का उपवास रखकर जनता के बीच बैठेंगे।
  3. गांव की चौपाल (फरवरी अंत तक): कांग्रेस अब दफ्तरों में नहीं, बल्कि गांव के वार्डों और खेतों की मेड़ों पर नजर आएगी।

क्या होगा असर?

8 जनवरी की बैठक के बाद यह तय हो जाएगा कि हिमाचल की सड़कों पर विरोध की लहर कितनी तेज होगी। लेकिन एक बात साफ है— विनय कुमार ने फ्रंट फुट पर आकर खेलना शुरू कर दिया है और विपक्षी खेमे में इस रणनीति को लेकर बेचैनी साफ देखी जा सकती है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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