बलदेव सिंह चौहान, संपादक
सोलन। साल 2026 नई उम्मीदें लेकर आया है, लेकिन जब हम पीछे मुड़कर 2025 के पन्नों को पलटते हैं, तो हिमाचल प्रदेश के लिए यह साल ‘चुनौतियों और बदलाव’ का प्रतीक रहा। पर्यटन में आए नए उछाल से लेकर बागवानी क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक सुधारों तक, देवभूमि ने इस साल कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए।
पेश है हिमालयन डॉन की विशेष रिपोर्ट:
बागवानी: ‘यूनिवर्सल कार्टन’ ने बदली सेब अर्थव्यवस्था की तस्वीर
हिमाचल की आर्थिकी की रीढ़ यानी सेब बागवानी के लिए 2025 एक निर्णायक साल रहा। सरकार ने इस साल ‘यूनिवर्सल कार्टन’ को सख्ती से लागू किया, जिससे बागवानों को वजन के हिसाब से सही दाम मिलना सुनिश्चित हुआ। बिचौलियों के चंगुल से बचकर किसानों ने सीधे लाभ कमाया। हालांकि, साल के अंत में न्यूजीलैंड से आने वाले सस्ते आयातित सेबों पर ड्यूटी कम होने की चर्चा ने बागवानों को थोड़ा चिंतित भी किया।
पर्यटन: ऑफ-बीट डेस्टिनेशन और होम-स्टे का बोलबाला
2025 में हिमाचल के पर्यटन ने अपनी पुरानी चमक वापस पाई। शिमला और मनाली के पारंपरिक रास्तों से हटकर पर्यटकों ने काजा, स्पीति, जंजैहली और सांगला जैसी ऑफ-बीट जगहों को तरजीह दी। प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए ‘होम-स्टे रूल्स 2025’ ने ग्रामीण पर्यटन को नई मजबूती दी, जिससे गांव के युवाओं को अपने ही घर में रोजगार मिला।
सरकारी फैसले: कर्मचारियों का इंतजार और जनकल्याण
कर्मचारी वर्ग के लिए यह साल मिला-जुला रहा। जहां एक तरफ महंगाई भत्ते (DA) की किश्तों का इंतजार बना रहा, वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने ‘दूध प्रोत्साहन योजना’ जैसी नई स्कीमें लॉन्च कीं। इसके अलावा, आपदा प्रभावित क्षेत्रों जैसे कुल्लू के टांडी गांव के लिए विशेष राहत पैकेज और पुनर्वास के कार्यों ने सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाया।
बुनियादी ढांचा (Infrastructure): टनल और फोरलेन का जाल
प्रदेश में कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम तेज हुआ। कीरतपुर-मनाली फोरलेन ने पर्यटकों की राह आसान की, तो वहीं शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधाओं ने राजधानी की तस्वीर बदल दी। इसके साथ ही, कई नई पेयजल योजनाओं ने सूखे की मार झेल रहे ऊंचाई वाले गांवों तक पानी पहुँचाया।
पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
साल 2025 में भी मानसून के दौरान कुछ क्षेत्रों में नुकसान हुआ, लेकिन इस बार प्रशासन की मुस्तैदी और ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ ने जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद की। प्रदेश ने इस साल ‘ग्रीन हिमाचल’ के अपने संकल्प को दोहराते हुए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों को बेड़े में शामिल किया।
‘ग्रीन हिमाचल’ की ओर बढ़ते कदम
साल 2025 में हिमाचल को ‘ग्रीन स्टेट’ बनाने की दिशा में तेजी से काम हुआ। सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ी और चार्जिंग स्टेशन का जाल बिछाया गया। सौर ऊर्जा परियोजनाओं को भी गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बड़े कदम उठाए गए।
युवाओं के लिए रोजगार और भर्तियां
पिछले साल सरकारी नौकरियों के लिए रुकी हुई चयन प्रक्रियाओं में तेजी आई। नए चयन आयोग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं आयोजित की गईं, जिससे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं में एक नई उम्मीद जगी।
निष्कर्ष: 2026 के लिए क्या है खास?
हिमाचल अब विकास के एक ऐसे मोड़ पर है जहां वह अपनी प्राकृतिक सुंदरता को बचाते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है। 2026 में प्रदेशवासियों को उम्मीद है कि सेब के दामों में और स्थिरता आएगी, युवाओं के लिए नई सरकारी भर्तियों के द्वार खुलेंगे और सड़कों का जाल और मजबूत होगा।
हिमालयन डॉन (Himalayan Dawn) की ओर से सभी प्रदेशवासियों को नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं!
