हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे एसएमसी (स्कूल प्रबंधन समिति) शिक्षकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा राहत भरा फैसला लिया है। सरकार ने 1133 एसएमसी शिक्षकों का औपचारिक रूप से शिक्षा विभाग में विलय कर दिया है। इस निर्णय से उन शिक्षकों को विशेष लाभ मिला है, जो पिछले 15 से 20 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे थे।
जॉब ट्रेनी आधार पर मिली नियुक्ति
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार इन शिक्षकों को 5 प्रतिशत एलडीआर (लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) कोटे के तहत ‘जॉब ट्रेनी’ के रूप में नियुक्त किया गया है। फिलहाल इन शिक्षकों के वर्तमान कार्यस्थलों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, हालांकि भविष्य में छात्र संख्या के आधार पर समायोजन संभव है।
श्रेणीवार शिक्षकों का विवरण
विलय किए गए कुल 1133 शिक्षकों में विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं:
सीएंडवी (C&V): 671
टीजीटी (TGT): 410
जेबीटी (JBT): 52
दो साल बाद होगा नियमितीकरण
आदेशों के मुताबिक चयनित शिक्षक पहले दो वर्षों तक जॉब ट्रेनी के रूप में कार्य करेंगे। इसके बाद संतोषजनक सेवाकाल पूरा होने पर उन्हें नियमित कर दिया जाएगा। इनका चयन हाल ही में आयोजित एलडीआर परीक्षा और 27 मार्च को हुई काउंसलिंग प्रक्रिया के आधार पर किया गया है।
ट्रांसफर नियमों के दायरे में आए शिक्षक
इस फैसले के बाद अब ये शिक्षक भी विभाग के ट्रांसफर नियमों के अंतर्गत आएंगे। शिक्षा निदेशालय ने जिलों से उन स्कूलों का विवरण मांगा है, जहां शिक्षकों की कमी है, ताकि आवश्यकता अनुसार समायोजन किया जा सके।
भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव
राज्य सरकार ने जेबीटी, टीजीटी, सीएंडवी और पीईटी पदों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन करते हुए 5 प्रतिशत एलडीआर कोटा निर्धारित किया है। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 2400 एसएमसी शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से पहले चरण में 1133 शिक्षकों को इस योजना का लाभ मिला है।
शिक्षा क्षेत्र में अहम कदम
पंचायत चुनाव से पहले लिया गया यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था भी मजबूत होगी।
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