टटियाना पंचायत में पर्ची सिस्टम से चयन

बिना चुनाव, बिना शोर—हिमाचल की इस पंचायत में ‘पर्ची सिस्टम’ से चुना गया पूरा नेतृत्व, बना मिसाल

Sirmour

हिमालयन डॉन, नाहन (राजेश): लोकतंत्र की एक अनोखी और प्रेरणादायक तस्वीर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में देखने को मिली है, जहां टटियाना पंचायत ने पारंपरिक चुनावी प्रक्रिया से हटकर एक मिसाल कायम की है। यहां पंचायत चुनाव बिना किसी प्रचार, खर्च और प्रतिस्पर्धा के “पर्ची सिस्टम” के जरिए संपन्न हुए—और पूरा पैनल सर्वसम्मति से चुन लिया गया।

यह पहल न सिर्फ प्रदेश में चर्चा का विषय बनी है, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र के एक नए और शांतिपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है।

‘शाटी पाशी का चौंतरा’ बना लोकतंत्र का मंच

“शाटी पाशी का चौंतरा” के नाम से प्रसिद्ध इस पंचायत में चयन प्रक्रिया महासू देवता मंदिर परिसर में आयोजित की गई। गांव के लोग एकत्रित हुए, जहां परंपरागत तरीके से पर्चियां डाली गईं और उसी आधार पर पंचायत के प्रमुख पदों का चयन किया गया।

इस अनोखी प्रक्रिया में:

  • प्रधान पद के लिए पूनम शर्मा
  • उपप्रधान पद के लिए दाता राम शर्मा
  • बीडीसी सदस्य के लिए प्रियंका शर्मा का चयन सर्वसम्मति से किया गया।
2020 से लागू है यह अनोखा मॉडल

गांव में यह व्यवस्था वर्ष 2020 से लागू है। इसके तहत पंचायत के चार प्रमुख परिवारों से प्रतिनिधियों के नाम तय किए जाते हैं, जिनकी पर्चियां डाली जाती हैं। इसके बाद पूरे गांव की सहमति से बिना किसी विवाद के अंतिम चयन होता है।

यह मॉडल पारदर्शिता, विश्वास और सामूहिक निर्णय की भावना पर आधारित है—जहां जीत-हार का सवाल ही नहीं उठता।

न खर्च, न विवाद—सिर्फ सहमति और सौहार्द

जहां आमतौर पर पंचायत चुनावों में भारी खर्च, राजनीतिक खींचतान और आपसी मतभेद देखने को मिलते हैं, वहीं टटियाना पंचायत ने इन सभी चुनौतियों को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रणाली से चुनावी खर्च शून्य हो जाता है, गांव में भाईचारा और एकता मजबूत होती है तथा नेतृत्व चयन बिना तनाव और विवाद के होता है।

ग्रामीण लोकतंत्र का ‘हिमाचली मॉडल’ बनता उदाहरण

टटियाना पंचायत की यह पहल अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रही। यह पूरे हिमाचल और देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की व्यवस्था को सही संतुलन और पारदर्शिता के साथ अपनाया जाए, तो यह ग्रामीण स्तर पर लोकतंत्र को और मजबूत कर सकती है।


टटियाना पंचायत ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, संवाद और सहमति से भी मजबूत बनाया जा सकता है। यह मॉडल आने वाले समय में कई अन्य पंचायतों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।

यह भी पढ़ें:- हिमाचल में कुदरत का ‘ऑरेंज अलर्ट’: अगले 48 घंटे भारी, आंधी-ओलावृष्टि और बर्फबारी की चेतावनी

हिमाचल प्रदेश की सभी ताज़ा और सटीक खबरों के लिए जुड़े रहें हिमालयन डॉन के साथ।

WhatsApp चैनल:
Join WhatsApp Channel⁠
Telegram चैनल:
Join Telegram Channel⁠
Facebook पेज:
Join Facebook Page

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *