चूड़धार महादेव मंदिर सिरमौर हिमाचल प्रदेश में भगवान शिव की प्रतिमा और दर्शन करते श्रद्धालु

सिरमौर: आस्था की ऊँचाइयों पर गूँजे जयकारे, चार माह बाद खुले चूड़धार में शिरगुल महाराज के कपाट

Sirmour

नोहराधार: देवभूमि हिमाचल की पावन वादियों और सिरमौर की सबसे ऊँची चोटी पर विराजमान आराध्य देव शिरगुल महाराज के धाम, चूड़धार में आज से भक्ति का नया संचार शुरू हो गया है। लगभग चार महीनों के लंबे अंतराल और भारी बर्फबारी के कारण बंद रहने के बाद, आज 14 अप्रैल को बैसाखी संक्रांति के पावन पर्व पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।

​समुद्र तल से 11,965 फीट की ऊँचाई पर स्थित इस पावन तीर्थ के कपाट खुलने की प्रक्रिया सुबह तड़के ही शुरू हो गई थी, जिसके गवाह सैकड़ों श्रद्धालु बने।

परंपरा और विधि-विधान का अनूठा संगम

​कपाट खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपरिक रही। सुबह सवेरे मंदिर के पुजारियों द्वारा विशेष मंत्रोच्चार, शुद्धिकरण और हवन-यज्ञ के साथ मंदिर के द्वार खोले गए। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा चूड़धार परिसर ‘जय शिरगुल महाराज’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

​स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर सेवा समिति ने इस दिन के लिए कई दिनों से तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। भारी बर्फ की चादर के बीच रास्तों को सुगम बनाने और मंदिर परिसर की भव्य सजावट करने में स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्यों बंद रहता है मंदिर?

​चूड़धार महादेव का यह मंदिर भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में स्थित है। सर्दियों के दौरान यहाँ 10 से 15 फीट तक बर्फ जमा हो जाती है, जिससे तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर जाता है। सुरक्षा कारणों और आवाजाही के रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध होने के चलते प्रशासन हर साल दिसंबर के मध्य में मंदिर को बंद कर देता है।

​इस वर्ष भी कड़ाके की ठंड और भारी हिमपात के बाद अब अप्रैल के मध्य में मौसम में सुधार होने पर इसे दोबारा खोला गया है। कपाट खुलने से न केवल भक्तों में खुशी है, बल्कि क्षेत्र के छोटे व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई है।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंधन और दिशानिर्देश

​प्रशासन और मंदिर समिति ने भक्तों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कुछ कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। यद्यपि कपाट खुल गए हैं, लेकिन ऊँचाई वाले क्षेत्रों में अभी भी मौसम का मिजाज अनिश्चित बना हुआ है।

  • मौसम पर रखें नज़र: श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की एडवायजरी को जरूर पढ़ लें।
  • गर्म कपड़ों की अनिवार्यता: शिखर पर अभी भी बर्फीली हवाएं चल रही हैं, अतः पर्याप्त ऊनी और गर्म कपड़े साथ ले जाना अनिवार्य है।
  • सावधानीपूर्वक चढ़ाई: नोहराधार और सराहां के रास्तों पर अभी भी कुछ स्थानों पर फिसलन और बर्फ जमी हुई है, इसलिए चढ़ाई करते समय विशेष सावधानी बरतें।
  • समय का ध्यान: सूर्यास्त से पहले सुरक्षित स्थानों या सराय तक पहुँचने का प्रयास करें।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति

​चूड़धार केवल एक धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए भी स्वर्ग माना जाता है। कपाट खुलने के साथ ही यहाँ पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, जिससे जिला सिरमौर और शिमला के सीमावर्ती क्षेत्रों में होम-स्टे, ढाबों और स्थानीय गाइडों के रोजगार में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

​आज पहले ही दिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र मूर्ति के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर समिति का अनुमान है कि आने वाले सप्ताहांत में यह संख्या हज़ारों में पहुँच सकती है।

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