हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों पर विधानसभा में बयान देते हुए

स्मार्ट मीटर से बढ़े बिजली बिलों की गड़बड़ियां होंगी दूर, विधानसभा में बोले CM सुक्खू

Himachal

शिमला: हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने के बाद बढ़े हुए बिलों को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का सामना नहीं करने दिया जाएगा और सभी शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

शुक्रवार को विधानसभा में कांग्रेस विधायक राम कुमार के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्मार्ट मीटर केंद्र सरकार के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार लगाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि स्मार्ट मीटर के बाद बिजली बिलों में कोई अनियमितता सामने आती है तो उसे तुरंत ठीक किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कई क्षेत्रों से बढ़े हुए बिलों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ऐसे मामलों में उपभोक्ता संबंधित कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने की बात भी कही, ताकि शिकायतों का शीघ्र और प्रभावी निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, कुछ क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर बदलने की धीमी प्रक्रिया पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा।

वहीं, सदन में शिक्षा से जुड़े एक अन्य प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु और हरियाणा जैसे राज्यों में फीस नियमों में बदलाव किए गए हैं और हिमाचल प्रदेश सरकार भी निजी स्कूलों द्वारा अत्यधिक फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए अपने नियमों में संशोधन करने पर विचार कर रही है।

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य के निजी स्कूल हिमाचल प्रदेश विनियमन अधिनियम, 1997 के तहत संचालित हो रहे हैं, लेकिन इसमें फीस निर्धारण को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सीधे तौर पर निजी स्कूलों की फीस तय नहीं करती है, हालांकि यदि किसी जनप्रतिनिधि के पास अधिक फीस वसूली के ठोस प्रमाण हैं तो सरकार को अवगत कराया जा सकता है, जिस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, शिक्षा मंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस प्रावधान के तहत दाखिले सीमित थे, लेकिन राज्य सरकार द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों और शिक्षा विभाग के प्रयासों से अब इनकी संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

सरकार के इन बयानों से साफ है कि एक ओर जहां स्मार्ट मीटर से जुड़े तकनीकी और बिलिंग विवादों को दूर करने पर फोकस किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा क्षेत्र में भी पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

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