MIFF 2026 में चयनित सिरमौर की पाबुच ज्ञान परंपरा पर आधारित फिल्म "मैं हूँ पाबुच" का पोस्टर।

सिरमौर की अनूठी ज्ञान परंपरा पहुंचेगी अंतरराष्ट्रीय मंच तक, MIFF 2026 में चुनी गई ‘मैं हूँ पाबुच’ डॉक्यूमेंट्री

Sirmour

नाहन (राजेश), 12 जून। जिला सिरमौर की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाली बड़ी उपलब्धि सामने आई है। सिरमौर के खड़काहन गांव में सदियों से संरक्षित पाबुच ब्राह्मण समुदाय की अनूठी ज्ञान परंपरा पर आधारित प्रख्यात फिल्मकार डॉ. देव कन्या ठाकुर की वृत्तचित्र फिल्म ‘मैं हूँ पाबुच’ का चयन प्रतिष्ठित मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 (MIFF 2026) के प्रिज़्म सेक्शन में प्रदर्शन के लिए हुआ है।

फिल्म का भारतीय प्रीमियर 16 जून को मुंबई में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में होगा। यह उपलब्धि न केवल फिल्म निर्माण के क्षेत्र में बल्कि सिरमौर की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।

सिरमौर के खड़काहन गांव की विरासत पर केंद्रित है फिल्म

वृत्तचित्र ‘मैं हूँ पाबुच’ जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के खड़काहन गांव में निवास करने वाले पाबुच ब्राह्मण समुदाय की दुर्लभ ज्ञान परंपरा को दर्शाती है। यह समुदाय सदियों से पांडुलिपियों, वैदिक ज्ञान और ‘सांचा विद्या’ जैसी विशिष्ट परंपराओं को संरक्षित किए हुए है।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे सिरमौर के इस छोटे से गांव में आज भी ऐसी ज्ञान-संपदा सुरक्षित है, जिसकी जड़ें प्राचीन कश्मीर की शारदा परंपरा से जुड़ी हुई हैं। यहां संरक्षित पांडुलिपियां और ज्ञान प्रणाली भारत की प्राचीन बौद्धिक विरासत का जीवंत उदाहरण मानी जाती हैं।

‘सांचा विद्या’ और 15वीं शताब्दी की पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण

वृत्तचित्र में पाबुच समुदाय द्वारा संरक्षित “पवुची पांडुलिपि परंपरा” और उनकी विशिष्ट ज्ञान प्रणाली ‘सांचा विद्या’ को विस्तार से दर्शाया गया है। सांचा वैदिक ज्ञान का संक्षिप्त लेकिन अत्यंत गूढ़ स्वरूप माना जाता है, जिसके माध्यम से समुदाय लोगों को मार्गदर्शन और समाधान प्रदान करता है।

फिल्म यह भी उजागर करती है कि खड़काहन गांव में 15वीं शताब्दी से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियों को आज भी अत्यंत सावधानी से संरक्षित किया गया है। समुदाय के लगभग प्रत्येक परिवार द्वारा इन ग्रंथों की रक्षा की जा रही है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस ज्ञान परंपरा का संवहन किया जा रहा है।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान

MIFF के प्रतिष्ठित प्रिज़्म सेक्शन में चयन के साथ अब सिरमौर की यह अनूठी विरासत राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचेगी। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फिल्म हिमाचल और विशेष रूप से सिरमौर की लोक-ज्ञान परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रदर्शन विवरण

  • फिल्म: मैं हूँ पाबुच
  • निर्देशक: डॉ. देव कन्या ठाकुर
  • महोत्सव: 19वां मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026
  • सेक्शन: प्रिज़्म (डॉक्यूमेंट्री)
  • तिथि: 16 जून 2026
  • समय: प्रातः 10:00 बजे
  • स्थान: ऑडी-2, एफडी-एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स, पेडर रोड, मुंबई

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