टटियाना के बाद पच्छाद की दाड़ो देवरिया पंचायत ने दिखाई एकता की ताकत, प्रधान से लेकर वार्ड सदस्य तक सर्वसम्मति से चयन
सराहां | हिमालयन डॉन संवाददाता,
जिला सिरमौर में पंचायत चुनावों के बीच लोकतंत्र की एक अनूठी और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आ रही है। जहां आमतौर पर चुनावी मुकाबलों में खींचतान और प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, वहीं यहां के ग्रामीण आपसी भाईचारे और एकता का परिचय देते हुए पंचायतों का चयन सर्वसम्मति से कर रहे हैं।
शिलाई विधानसभा क्षेत्र की टटियाना पंचायत के बाद अब पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत दाड़ो देवरिया भी निर्विरोध चुनी गई है। ग्रामीणों ने राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखते हुए एकजुट होकर पूरे पंचायत पैनल का चयन बिना किसी चुनावी प्रक्रिया के कर लिया।
इस संबंध में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पंचायत के सभी वार्डों के लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। बैठक की अध्यक्षता पूर्व प्रधान गीता देवी, पूर्व उपप्रधान नरेंद्र सिंह और पूर्व उपप्रधान संदीप चौहान ने की। गहन विचार-विमर्श के बाद सभी ने एक स्वर में पंचायत कार्यकारिणी के नामों पर सहमति जताई।
सर्वसम्मति से सुमन कुमारी को पंचायत प्रधान और सुरजीत सिंह को उपप्रधान चुना गया। इसके अलावा वार्ड स्तर पर भी निर्विरोध चयन हुआ।
| पद | चयनित प्रतिनिधि | वार्ड/क्षेत्र |
|---|---|---|
| प्रधान | सुमन कुमारी | पंचायत मुख्य |
| उपप्रधान | सुरजीत सिंह | पंचायत मुख्य |
| वार्ड सदस्य | रीता देवी | चेवला बकानग |
| वार्ड सदस्य | रविंदर | दाड़ो-1 |
| वार्ड सदस्य | रोहित | दाड़ो-2 |
| वार्ड सदस्य | राधा देवी | थाना कावड़ी |
| वार्ड सदस्य | सुनीता देवी | सोहला |
पंचायत के प्रतिनिधि सुभाष ठाकुर ने बताया कि पूरे गांव ने बिना किसी विवाद के सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया, जो क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रतीक है। इस चयन की औपचारिक सूचना जल्द ही खंड विकास अधिकारी पच्छाद को भेजी जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी 2021 के पंचायत चुनावों में भी जिला सिरमौर की 33 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई थीं, जिसने प्रदेशभर में एक मिसाल कायम की थी। मौजूदा चुनावों में भी यह सिलसिला जारी है और संभावना जताई जा रही है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक कई अन्य पंचायतें भी इसी राह पर चल सकती हैं।
यह घटनाक्रम न सिर्फ सिरमौर बल्कि पूरे हिमाचल के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि लोकतंत्र केवल चुनावी प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि आपसी सहमति और सामूहिक निर्णय की शक्ति भी है।
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