शिलाई। गिरिपार क्षेत्र के युवाओं ने एक बार फिर अपने साहस और हौसले का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 23 से 27 मार्च तक जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय पैरा स्पोर्ट्स तलवारबाजी (फेंसिंग) प्रतियोगिता में जामना गांव के अनिल ठाकुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
वहीं, शिलाई क्षेत्र की ही कु. सविता नेगी ने भी पहली बार इस प्रतियोगिता में भाग लेते हुए क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। दोनों खिलाड़ियों की यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि यह उनका इस खेल में पहला ही राष्ट्रीय स्तर का अनुभव था।
जानकारी के अनुसार, अनिल ठाकुर लगभग 12 वर्ष पूर्व एक ढंगार (खाई/ढलान) में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद से उनका शरीर कमर के नीचे से सुन्न हो गया। वहीं, सविता नेगी को करीब 19 वर्ष पहले एक सड़क हादसे में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण वह भी कमर के नीचे से असमर्थ हो गईं। दोनों खिलाड़ी वर्तमान में व्हीलचेयर का सहारा लेकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
इन शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अनिल और सविता ने हार नहीं मानी और पैरा स्पोर्ट्स के माध्यम से अपनी नई पहचान बनाई। तलवारबाजी जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में उनका प्रदर्शन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह साबित करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और खेल प्रेमियों ने दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इन युवाओं ने गिरिपार ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और सरकारी सहयोग मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदेश और देश के लिए पदक जीत सकते हैं।
प्रेरणा का स्रोत बने दोनों खिलाड़ी
अनिल ठाकुर और सविता नेगी आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं, जो जीवन में कठिनाइयों के सामने हार मान लेते हैं। इनकी सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, अगर हौसला बुलंद हो तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
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