हिमालयन डॉन, किन्नौर। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एवं डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र डॉ. प्रेम लाल गौतम ने किन्नौर दौरे के दौरान कृषि एवं बागवानी छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों के अधिकारों, सतत कृषि विकास, ग्रामीण सशक्तिकरण और नवाचार आधारित खेती पर विस्तार से चर्चा की।
वर्तमान में Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University के कुलाधिपति डॉ. गौतम ने क्षेत्रीय उद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (आरएचआरटीएस), शारबो और Krishi Vigyan Kendra Kinnaur का दौरा किया। किन्नौर में हिमाचल गौरव सम्मान प्राप्त करने के अवसर पर उनके इस दौरे को विद्यार्थियों और संस्थान के लिए प्रेरणादायक बताया गया।
शारबो केंद्र में उनका स्वागत एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रमोद कुमार, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने किया। इस दौरान ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण ले रहे बीएससी औद्यानिकी के छात्रों के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. गौतम ने कहा कि भारतीय कृषि का भविष्य वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करता है। उन्होंने किसानों के अधिकारों की रक्षा, जलवायु अनुकूल खेती, संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि बागवानी केवल आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का प्रभावी साधन भी है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीकों, मूल्य संवर्धन और नवाचार को अपनाने की सलाह दी।
युवाओं से आह्वान करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि उन्हें केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगार सृजन करने वाले बनकर गांवों में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए। उन्होंने अपने लंबे पेशेवर अनुभवों और चुनौतियों को साझा करते हुए छात्रों को लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रमोद कुमार ने डॉ. गौतम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन छात्रों के लिए अमूल्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से डॉ. गौतम के समर्पण, सेवा भावना और उत्कृष्टता के आदर्शों को अपनाने का आग्रह किया।
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