HPNLU शिमला में उत्तराधिकार कानून और लैंगिक न्याय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

On: May 21, 2026 7:18 PM
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HPNLU शिमला में उत्तराधिकार कानून और लैंगिक न्याय विषय पर आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान के दौरान प्रो. पूनम प्रधान सक्सेना को सम्मानित करते हुए
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हिंदू उत्तराधिकार कानूनों में हालिया बदलावों और लैंगिक समानता पर हुई गहन चर्चा

हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला। 21 मई, Himachal Pradesh National Law University (HPNLU) शिमला के सेंटर फॉर पर्सनल लॉ स्टडीज़ (CPLS) और वैवाहिक विवाद समाधान प्रकोष्ठ द्वारा “भारत में उत्तराधिकार कानून: लैंगिक न्याय और हाल के घटनाक्रम, विशेष रूप से हिंदू कानूनों के संदर्भ में” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 21 मई 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में व्यक्तिगत कानूनों, संवैधानिक मूल्यों और उत्तराधिकार कानूनों के बदलते स्वरूप को लेकर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर व्यक्तिगत कानूनों की प्रसिद्ध विशेषज्ञ और शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) पूनम प्रधान सक्सेना मुख्य वक्ता एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सरिता के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने उत्तराधिकार कानूनों की वर्तमान समय में बढ़ती प्रासंगिकता तथा लैंगिक न्याय को लेकर समाज और न्यायपालिका में हो रही चर्चाओं पर प्रकाश डाला।

अपने व्याख्यान में प्रो. (डॉ.) पूनम प्रधान सक्सेना ने हिंदू उत्तराधिकार कानूनों में हाल के वर्षों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों और न्यायिक व्याख्याओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं के विरासत अधिकारों को लेकर न्यायपालिका की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। साथ ही समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव जैसे संवैधानिक सिद्धांतों को व्यक्तिगत कानूनों में प्रभावी रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक कानूनी ढांचे को आधुनिक संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप बनाना समय की मांग है, ताकि समाज में वास्तविक न्याय और समावेशिता सुनिश्चित की जा सके। व्याख्यान के दौरान कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों और उत्तराधिकार से जुड़े समकालीन कानूनी मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्रों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न कानूनी प्रश्नों और समकालीन चुनौतियों पर विशेषज्ञों से चर्चा की।

कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। सेंटर फॉर पर्सनल लॉ स्टडीज़ के निदेशक प्रो. डॉ. आलोक कुमार तथा संकाय समन्वयक डॉ. सरिता ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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