हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला | हिमाचल प्रदेश में पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कानूनी बदलाव किया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के साथ हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन अधिनियम 2026 लागू हो गया है, जिसमें ग्राम सभाओं के कोरम से लेकर चुनावी पात्रता तक अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं।
ग्राम सभाओं में अब आसान होगा कोरम
नए संशोधन के तहत अब ग्राम सभा की बैठक में कोरम पूरा करने के लिए कुल मतदाताओं के कम से कम 10 प्रतिशत (1/10) लोगों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। पहले यह सीमा 25 प्रतिशत (एक चौथाई) थी, जिसके चलते कई बार बैठकें स्थगित करनी पड़ती थीं और विकास कार्य अटक जाते थे।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से अब ग्राम सभाओं में अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी और योजनाओं को समय पर मंजूरी मिल सकेगी। इससे पंचायत स्तर पर लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी।
नशे के खिलाफ सख्त प्रहार
संशोधन का सबसे अहम पहलू नशे के खिलाफ कड़ा रुख है। चिट्टे (ड्रग्स) के मामलों में संलिप्त व्यक्ति अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यदि कोई जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद दोषी पाया जाता है, तो उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त कर दी जाएगी।
साफ छवि वाले नेतृत्व को बढ़ावा
सरकार के इस फैसले को पंचायत स्तर पर स्वच्छ और जवाबदेह नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से प्रदेश में बढ़ते नशे के मामलों को देखते हुए यह प्रावधान लागू किया गया है, जिससे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की राजनीति में एंट्री पर रोक लगेगी।
क्या होगा असर?
- ग्राम सभाओं में कोरम पूरा करना होगा आसान
- विकास कार्यों में नहीं आएगी रुकावट
- नशे से जुड़े लोगों की चुनावी भागीदारी पर रोक
- जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही होगी तय
हिमाचल में पंचायत व्यवस्था अब नए ढांचे के साथ आगे बढ़ेगी, जहां एक ओर विकास कार्यों को रफ्तार मिलेगी, वहीं नशे के खिलाफ सख्ती से साफ-सुथरी राजनीति की दिशा मजबूत होगी।
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