शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के 145 सीबीएसई (CBSE) स्कूलों में अब शिक्षकों की पोस्टिंग पूरी तरह से परीक्षा की मेरिट के आधार पर की जाएगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां करना है।
मेरिट-कम-प्रेफरेंस: कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली इस प्रक्रिया में ‘मेरिट-कम-प्रेफरेंस’ मॉडल को अपनाया गया है।
- स्क्रीनिंग टेस्ट: चयन प्रक्रिया की शुरुआत एक लिखित स्क्रीनिंग टेस्ट से होगी।
- दस्तावेज सत्यापन: परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच और काउंसलिंग की जाएगी।
- विषयवार मेरिट: इसके बाद विषय के अनुसार एक फाइनल मेरिट सूची तैयार होगी।
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टॉपर को मिलेगा अपनी पसंद का स्कूल
इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले शिक्षक को अपनी पसंद का स्टेशन या स्कूल चुनने का पहला अधिकार होगा।
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली के अनुसार: “यदि किसी विषय में कुल 134 पद खाली हैं, तो रैंक-1 वाले शिक्षक के पास सभी 134 स्कूलों का विकल्प होगा। वहीं, दूसरे स्थान वाले के पास 133 विकल्प बचेंगे। यह क्रम इसी प्रकार नीचे की रैंक तक चलता रहेगा।”
चयन प्रक्रिया की मुख्य शर्तें और निर्देश
| चरण | विवरण |
|---|---|
| वरीयता (Priority) | उच्च मेरिट वाले शिक्षक को उनकी पहली पसंद का स्कूल आवंटित होगा। |
| डेटा पारदर्शिता | बोर्ड को प्रत्येक अभ्यर्थी का प्राप्तांक, श्रेणी और सत्यापित दस्तावेज निदेशालय को सौंपने होंगे। |
| काउंसलिंग | पद-वार (Post-wise) काउंसलिंग अनिवार्य होगी ताकि कोई विसंगति न रहे। |
| संतुलन | इस व्यवस्था से दूरदराज के स्कूलों और शहरी स्कूलों के बीच शिक्षकों का सही संतुलन बना रहेगा। |
क्यों लिया गया यह फैसला?
शिक्षा निदेशालय का तर्क है कि मेरिट आधारित पोस्टिंग से न केवल प्रतिभाशाली शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि स्कूलों में शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। इससे उन शिक्षकों को लाभ होगा जो कठिन परिश्रम कर परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, क्योंकि उन्हें स्थानांतरण (Transfer) के लिए किसी सिफारिश की आवश्यकता नहीं होगी।
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