शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य की स्कूली शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने 15 अतिरिक्त राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों (GSSS) को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नए विस्तार के साथ ही हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों की कुल संख्या अब 145 हो गई है।
किन जिलों के स्कूलों को मिली मंजूरी? (पूरी लिस्ट)
शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश के 7 प्रमुख जिलों के 15 स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों में अब हिमाचल बोर्ड (HPBOSE) की जगह सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा:
- हमीरपुर: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बदरां, बटरान, रेल और जलाड़ी।
- कांगड़ा: बरौह, गंगथ और ठाकुरद्वारा स्कूल।
- सोलन: चंडी और जोघो स्कूल।
- बिलासपुर: पंजगाईं स्कूल।
- सिरमौर: अंबोया और सराहन स्कूल।
- शिमला: मतियाना स्कूल।
- मंडी: चौंतड़ा और कोटली स्कूल।
CBSE संबद्धता से छात्रों को क्या होगा लाभ?
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों को मिलेगा।
- राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम: छात्रों को वही सिलेबस पढ़ने को मिलेगा जो देश के बड़े कॉन्वेंट और केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाया जाता है।
- प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बढ़त: JEE, NEET और CUET जैसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं सीबीएसई के सिलेबस पर आधारित होती हैं। अब ग्रामीण छात्र भी इन परीक्षाओं में शहरी छात्रों को कड़ी टक्कर दे सकेंगे।
- बेहतर मूल्यांकन: सीबीएसई की उन्नत अंकन और मूल्यांकन प्रणाली से छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होगा।
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शिक्षकों के पदों और ‘लोक प्रशासन’ विषय पर नई नीति
सरकार ने केवल बोर्ड नहीं बदला, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी सुधार किया है। व्याख्याता/पीजीटी (लोक प्रशासन) के पदों की निरंतरता को लेकर सरकार ने निर्देश दिए हैं कि:
- पदों का युक्तिकरण: जिन स्कूलों में लोक प्रशासन विषय के विद्यार्थी अधिक हैं, वहां उन पदों को स्थानांतरित किया जाएगा जहां शिक्षकों की कमी है।
- ऐच्छिक विषय की संभावना: सरकार अब सीबीएसई से संबद्ध इन स्कूलों में ‘लोक प्रशासन’ (Public Administration) को एक ऐच्छिक (Optional) विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी में है। इसके लिए केंद्र सरकार और सीबीएसई बोर्ड के साथ मामला उठाया जाएगा।
सरकार का विजन: इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘क्वालिटी एजुकेशन’ को हर गांव तक पहुंचाना है, ताकि किसी भी छात्र को बेहतर शिक्षा के लिए अपना घर छोड़कर बड़े शहरों की ओर न भागना पड़े।
अगला कदम?
शिक्षा निदेशालय अब इन स्कूलों में बुनियादी ढांचे के उन्नयन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगा ताकि सीबीएसई के कड़े मानकों को पूरा किया जा सके।
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