हिमालयन डॉन, सोलन: हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। जिला सोलन के कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब (CTL) में जल्द ही अत्याधुनिक माइक्रोबायोलॉजी लैब की शुरुआत होने जा रही है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद प्रदेशवासियों को वायरस और बैक्टीरिया से संबंधित सैंपलों की जांच के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
वर्तमान समय में सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबायोलॉजी) से जुड़े सैंपलों को जांच के लिए पुणे सहित देश के अन्य राज्यों की लैब्स में भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन तक का समय लग जाता है, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है।
अब कंडाघाट में ही माइक्रोबायोलॉजी लैब स्थापित होने से जांच प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो जाएगी। अनुमान है कि आगामी दो महीनों के भीतर यह सुविधा आम जनता के लिए शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए लैब में अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं।
इस नई सुविधा के तहत पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया की पहचान की जा सकेगी। साथ ही पीलिया (जॉन्डिस) जैसे रोग फैलाने वाले वायरस और अन्य कारकों की सटीक जांच संभव होगी। इसके अलावा सब्जियों और खाद्य पदार्थों पर मौजूद सूक्ष्मजीवों, कीटनाशकों (पेस्टिसाइड्स) और जैविक संक्रमण की भी जांच की जाएगी।
अब तक कंडाघाट स्थित CTL लैब केवल केमिकल टेस्टिंग तक सीमित थी, जहां मुख्य रूप से मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच की जाती थी। हालांकि, सूक्ष्मजीवों की जांच की सुविधा का अभाव एक बड़ी कमी के रूप में सामने आ रहा था, जिसे अब दूर किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार के इस कदम से न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को भी समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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