नौणी विश्वविद्यालय को ‘स्कोच सिल्वर अवार्ड’ से किया सम्मानित, बागवानी और प्राकृतिक खेती में गाड़ा झंडा

On: April 4, 2026 7:12 PM
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नौणी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि स्कोच सिल्वर अवार्ड प्राप्त करते हुए।
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सोलन (नौणी) | 4 अप्रैल, 2026। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है। विश्वविद्यालय को बागवानी श्रेणी में प्रतिष्ठित स्कोच (SKOCH) अवार्ड (सिल्वर) से नवाजा गया है। यह सम्मान विश्वविद्यालय द्वारा संचालित ‘प्राकृतिक खेती आधारित एफपीसी (FPC) के उद्यमिता सशक्तिकरण’ परियोजना के लिए प्रदान किया गया है।

​क्यों मिला यह सम्मान?

​विश्वविद्यालय की यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ (PK3Y) पर आधारित है। इसके तहत SuSPNF (सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स प्लेटफॉर्म फॉर नेचुरल फार्मिंग) विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म किसानों के उत्पादन, प्रमाणन (Certification), संग्रहण और विपणन को एक ही मंच पर लाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह उपभोक्ता को खेत से लेकर घर तक उत्पाद की पूरी ‘ट्रेसबिलिटी’ (शुद्धता की जांच) प्रदान करता है।

​इन क्षेत्रों में किया गया सुधार:

  • ​हिमशिखर ऐप: किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ा गया।
  • ​CETARA-NF: प्राकृतिक खेती के प्रमाणन को सरल बनाया गया।
  • ​उचित मूल्य: ‘ट्रू कॉस्ट अकाउंटिंग’ के जरिए किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम सुनिश्चित किया गया।

​”यह सम्मान प्राकृतिक और सतत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के हमारे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। हम तकनीक और उद्यमिता के माध्यम से किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

— प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल, कुलपति (नौणी विश्वविद्यालय)

कठिन मूल्यांकन के बाद चयन

​स्कोच अवार्ड की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी और इसे देश के सबसे प्रतिष्ठित स्वतंत्र पुरस्कारों में से एक माना जाता है। इस पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया बेहद कठिन होती है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन, सहकर्मी समीक्षा, फील्ड सत्यापन और अंत में लाइव पोलिंग के आधार पर विजेता का निर्णय लिया जाता है। विश्वविद्यालय की ओर से यह पुरस्कार विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. इंदर देव ने प्राप्त किया।

​भविष्य की राह

​यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय बल्कि हिमाचल के उन हजारों किसानों के लिए भी बड़ी जीत है जो रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। यह मॉडल जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देता है और किसानों की आर्थिक व पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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