शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्नियोजन मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2017 से अब तक दिए गए सभी सेवा विस्तारों का पूरा ब्यौरा हलफनामे के रूप में पेश किया जाए।
मामला वर्ष 2017 में दिए गए उस महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश के कथित उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि विस्तार तभी संभव है जब कर्मचारी फंडामेंटल रूल्स 56 (डी) और संबंधित सेवा नियमों के दायरे में आता हो।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि नियमों के विपरीत बड़े पैमाने पर सेवा विस्तार दिए गए हैं। इस पर न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने राज्य सरकार को 19 दिसंबर 2017 से अब तक के सभी मामलों की सूची प्रस्तुत करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
केवल असाधारण योग्यता वालों को ही मिल सकता है सेवा विस्तार
अदालत में दलील दी गई कि सेवा विस्तार दुर्लभ मामलों में ही दिया जाना चाहिए और इसके लिए कर्मचारी में अतिरिक्त क्षमता, विशिष्ट ज्ञान और वैज्ञानिक दक्षता होना अनिवार्य है। याचिका में यह भी कहा गया कि विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में नियमों का उल्लंघन कर सेवा विस्तार दिए गए।
प्रमोशन इंक्रीमेंट मामले में सरकार की अपील, कर्मचारियों को नोटिस
दूसरे महत्वपूर्ण मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रमोशन इंक्रीमेंट से जुड़े एकल जज के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं।
यह मामला उन जूनियर बेसिक टीचर्स से जुड़ा है जिन्हें 1 अक्टूबर 2012 से पहले हेड टीचर पद पर पदोन्नत किया गया था। एकल जज ने 28 मई 2025 को उन्हें प्रमोशन इंक्रीमेंट देने का आदेश दिया था, लेकिन विभागीय स्तर पर आदेशों के अनुपालन को लेकर विवाद बना रहा।
खंडपीठ ने सरकार की अपील में हुई 176 दिनों की देरी को माफ करते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल तय की है।
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