हिमालयन डॉन, शिमला।
हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 17 से 20 अप्रैल तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज अंधड़, बारिश, ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की चेतावनी जारी की है। विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों, किसानों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
चार दिन बिगड़ेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, 17 से 20 अप्रैल के बीच मैदानी और मध्य पर्वतीय जिलों में तेज हवाएं चल सकती हैं। कई इलाकों में बिजली चमकने और ओलावृष्टि की भी संभावना है। शिमला, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर और कुल्लू के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो सकती है।
वहीं, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी का पूर्वानुमान है। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है और ऊपरी इलाकों में आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
पर्यटकों और किसानों के लिए अलर्ट
मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। खासकर बर्फबारी वाले इलाकों में जाने वाले पर्यटक मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा करें।
किसानों को भी ओलावृष्टि से फसलों को बचाने के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। विभाग ने एंटी-हेल नेट्स और अन्य सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है, ताकि बागवानी और सब्जी फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
मानसून को लेकर मिला-जुला अनुमान
इस बीच, मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के लिए इस साल जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश को लेकर दीर्घावधि पूर्वानुमान भी जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
हालांकि, लाहौल-स्पीति जिले में मानसून सामान्य से अधिक रह सकता है। चंबा, किन्नौर और हमीरपुर के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य के करीब रहने का अनुमान है।
देशभर में भी मानसून थोड़ा कमजोर
राष्ट्रीय स्तर पर भी इस बार मानसून थोड़ा कमजोर रहने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे देश में जून से सितंबर के दौरान दीर्घावधि औसत का लगभग 92 फीसदी वर्षा होने की संभावना है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में मानसून की औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की सामान्य औसत वर्षा 734.4 मिलीमीटर है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति कमजोर पड़ रही है और मानसून सीजन में अल-नीनो जैसी स्थिति बनने की आशंका है, जिसका असर बारिश पर पड़ सकता है। हालांकि हिंद महासागर में सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल की संभावना मानसून के लिए कुछ राहत दे सकती है।
सतर्कता ही बचाव
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि अगले चार दिनों तक मौसम की ताजा जानकारी लेते रहें और प्रशासन की ओर से जारी सलाह का पालन करें। पहाड़ी प्रदेश में मौसम के अचानक बदलते मिजाज को देखते हुए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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