शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार शाम सभी जिला उपायुक्तों (DCs) के साथ आयोजित एक वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘अपना विद्यालय-हिमाचल स्कूल एडॉप्शन कार्यक्रम’ को लेकर नए निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल स्कूल गोद लेने होंगे, बल्कि वहां जाकर छात्रों का मार्गदर्शन भी करना होगा।
अफसरों को गोद लेने होंगे 4 स्कूल, 5 जनवरी तक मांगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी उपायुक्त (DC), अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) और जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी कम से कम 4 सरकारी स्कूलों को गोद लेंगे।
- औचक निरीक्षण: अधिकारी इन स्कूलों का अचानक निरीक्षण करेंगे ताकि जमीनी हकीकत जानी जा सके।
- छात्रों से संवाद: महीने में एक बार अधिकारी छात्रों से करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं और नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
- डेडलाइन: गोद लिए गए स्कूलों की पूरी सूची 5 जनवरी, 2026 तक सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’: तस्करों की संपत्ति होगी जब्त
नशे के बढ़ते जाल पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ‘चिट्टा’ तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
- तस्करों की अवैध रूप से बनाई गई संपत्ति जब्त की जाएगी और उनके अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा।
- इस काले कारोबार में शामिल सरकारी कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा; उनके खिलाफ समयबद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
विकास कार्यों को लेकर बड़े फैसले
बैठक में मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार पर भी ध्यान केंद्रित किया:
- 80% पूर्ण कार्य: जिन निर्माण कार्यों का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, उन्हें बजट उपलब्ध कराकर प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए।
- फॉरेस्ट क्लीयरेंस: विकासात्मक कार्यों के लिए वन-भूमि से संबंधित स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
- BPL परिवारों की समीक्षा: गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के चयन को लेकर उपायुक्तों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री का संदेश: “हमारी सरकार छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए वचनबद्ध है। अधिकारी स्कूल प्रबंधन और सरकार के बीच एक सेतु (Bridge) का काम करेंगे ताकि शिक्षा के लिए आवंटित बजट का सही उपयोग हो सके।”
