मुख्यमंत्री सुक्खू और हिमाचल प्रदेश विधानसभा विशेष सत्र 17 फरवरी।

सुक्खू सरकार ने अचानक बुलाया विधानसभा का विशेष सत्र, जानें क्या है 17 फरवरी का मास्टरप्लान!

Himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश इस समय एक गंभीर आर्थिक और राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है। केंद्र सरकार द्वारा 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद पेश किए गए बजट में ‘राजस्व घाटा अनुदान’ (Revenue Deficit Grant – RDG) को बंद करने के फैसले ने राज्य की सुक्खू सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है। इस वित्तीय झटके से निपटने और केंद्र के समक्ष एकजुट होकर अपनी बात रखने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आगामी 17 फरवरी को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव दिया है।

विशेष सत्र की तैयारी और संवैधानिक प्रक्रिया

राज्य सरकार ने इस विशेष सत्र को बुलाने की औपचारिकताएं तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद, राज्य मंत्रिमंडल से ‘बाय सर्कुलेशन’ के माध्यम से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई और अब फाइल राजभवन भेजी गई है। विधानसभा सचिवालय के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव पर फिलहाल राज्यपाल की मुहर लगना बाकी है, क्योंकि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल अभी शिमला से बाहर हैं। उनके लौटते ही इस विशेष सत्र की अधिसूचना जारी होने की प्रबल संभावना है।

यह सत्र सामान्य सत्रों से अलग होगा, क्योंकि इसका एकमात्र एजेंडा प्रदेश के वित्तीय हितों की रक्षा करना और केंद्र सरकार से अपना हक मांगना है।


क्या है RDG और क्यों है यह हिमाचल के लिए ‘लाइफलाइन’?

राजस्व घाटा अनुदान (RDG) उन राज्यों को दिया जाता है जिनका खर्च उनकी कुल कमाई से अधिक होता है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सीमित संसाधनों के कारण राजस्व घाटा हमेशा एक चुनौती रहा है।

पंद्रहवें वित्त आयोग के आंकड़े: पंद्रहवें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2021 से 2026 तक के लिए कुल 37,199 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की थी। इसके तहत राज्य को हर साल एक निश्चित राशि मिल रही थी:

  1. वित्तीय वर्ष 2021-22: 10,249 करोड़ रुपये मिले।
  2. वित्तीय वर्ष 2022-23: 9,377 करोड़ रुपये मिले।
  3. वित्तीय वर्ष 2023-24: 8,058 करोड़ रुपये मिले।
  4. वित्तीय वर्ष 2024-25: 6,258 करोड़ रुपये जारी हुए।

अब, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय बजट में इस प्रावधान को अचानक बंद कर दिया गया है। इससे हिमाचल के राजस्व में हजारों करोड़ की सेंध लग गई है, जिसकी भरपाई करना फिलहाल असंभव नजर आ रहा है।

जहाँ एक ओर सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष का साथ चाहती है, वहीं विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

कांग्रेस की रणनीति:

मुख्यमंत्री सुक्खू ने 8 फरवरी को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी मंत्रियों और विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान रणनीति तैयार कर रहे हैं कि कैसे विधानसभा के विशेष सत्र में केंद्र के फैसले के खिलाफ एक मजबूत प्रस्ताव पारित कर दिल्ली भेजा जाए। सरकार का तर्क है कि RDG बंद करना हिमाचल के साथ ‘अन्याय’ है।

भाजपा का ‘बहिष्कार’ वाला रुख:

दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि सरकार विपक्ष के विधायकों की प्राथमिकताओं (MLA Priorities) को नजरअंदाज कर रही है। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भाजपा विधायकों की विकास योजनाओं और नाबार्ड (NABARD) के प्रोजेक्ट्स को बजट नहीं दिया गया, तो वे आगामी ‘विधायक प्राथमिकता बैठकों’ का बहिष्कार करेंगे।

भाजपा का आरोप है कि सुक्खू सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है, जबकि प्रदेश के भीतर विकास कार्य ठप पड़े हैं।


आर्थिक विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह

जानकारों का मानना है कि यदि राजस्व घाटा अनुदान बहाल नहीं होता है, तो हिमाचल प्रदेश को अपने कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और चल रही विकास परियोजनाओं के लिए कर्ज के जाल में और अधिक फंसना पड़ सकता है। प्रदेश पर पहले ही भारी कर्ज है, और RDG का बंद होना ‘कोढ़ में खाज’ जैसा साबित हो रहा है।

विशेष सत्र के दौरान सरकार एक संकल्प (Resolution) पारित करेगी, जिसे केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा। सरकार की कोशिश होगी कि विपक्ष भी इस प्रस्ताव का समर्थन करे ताकि केंद्र को यह संदेश जाए कि यह किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल की मांग है।

यह भी पढ़ें:- सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला; अब सीधे कंपनियों से खरीदी जाएंगी दवाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *