शिमला, 13 फरवरी 2026। हिमाचल प्रदेश में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों और राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज आयोजित सर्वदलीय बैठक में भाजपा के रुख को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा प्रहार किया है। सीएम ने बैठक बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की निंदा करते हुए इसे ‘हिमाचल विरोधी’ कदम बताया।
“भाजपा दुविधा में, राज्य के हितों से कर रही समझौता”
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने का प्रस्ताव राज्य की आर्थिकी के लिए घातक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति कर रही है और जनता के हितों की रक्षा करने के बजाय दुविधा में है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा नेता जनता के दबाव में बैठक में तो आए, लेकिन रुख स्पष्ट करने की हिम्मत न होने के कारण बीच में ही वॉकआउट कर गए। वे जानते हैं कि केंद्र का यह कदम गलत है, लेकिन वे राज्य के अधिकारों के लिए खड़े होने को तैयार नहीं हैं।”
विपक्षी दलों का मिला साथ, भाजपा अलग-थलग
बैठक में कांग्रेस के अलावा सीपीएम (CPI-M), आम आदमी पार्टी (AAP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने राज्य सरकार का बिना शर्त समर्थन किया। इन सभी दलों ने राजस्व घाटा अनुदान की बहाली के लिए मुख्यमंत्री के साथ प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जताई है।
- राकेश सिंघा (सीपीएम): राज्य के हितों के लिए आम सहमति बनाने पर जोर दिया।
- डॉ. राजेश चानना (आप): केंद्र से वित्तीय सहायता का समर्थन करते हुए प्रस्ताव पेश किया।
- बसपा प्रतिनिधि: आपदाओं के बाद राज्य के सीमित संसाधनों पर पड़ रहे दबाव का हवाला दिया।
वित्तीय आंकड़ों का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार और वर्तमान सरकार के बीच वित्तीय तुलना करते हुए कहा:
- पूर्व भाजपा सरकार: अपने कार्यकाल में 54,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान और 16,000 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा प्राप्त किया।
- वर्तमान सरकार: अब तक केवल 17,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान ही मिल पाया है।
“अनुच्छेद 275 (1) के तहत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, जो 1952 से चला आ रहा है। यह व्यवस्था आय और व्यय के अंतर को कम करने के लिए है।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
पुरानी आपदा का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने 2023 की आपदा को याद दिलाते हुए कहा कि जब विशेष राहत पैकेज की बात आई थी, तब भी भाजपा ने सदन से वॉकआउट किया था। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जनता के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कुलदीप सिंह राठौर ने भी भाजपा के इस रवैये की कड़ी आलोचना की।
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