हिमाचल में शहरी विकास को रफ्तार

हिमाचल में शहरी विकास को रफ्तार: 47 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त, SDM को मिले वित्तीय अधिकार

Himachal

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश की शहरी स्थानीय संस्थाओं के सुचारू संचालन और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के 47 नगर निकायों में प्रशासकों (Administrators) की नियुक्ति के औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

​इस निर्णय के तहत संबंधित क्षेत्रों के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारियों, कार्यकारी अधिकारियों और सचिवों को प्रशासक का जिम्मा सौंपा गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य निकायों के दैनिक कामकाज को बिना किसी बाधा के जारी रखना और जनहित के विकास कार्यों को समय पर पूरा करना है।

क्यों पड़ी प्रशासकों की आवश्यकता?

​हिमाचल प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1994 की धारा 268 (1) के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार ने यह व्यवस्था की है। दरअसल, कई नगर निकायों में कार्यकाल पूरा होने या अन्य तकनीकी कारणों से प्रशासनिक शून्यता की स्थिति बन रही थी। ऐसी स्थिति में सड़कों की मरम्मत, स्वच्छता प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट्स और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स लटकने की संभावना थी।

​जनहित को सर्वोपरि रखते हुए, सरकार ने इन निकायों की कमान सीधे अधिकारियों के हाथ में दे दी है ताकि फाइलों का निपटारा तेजी से हो सके।

एसडीएम (SDM) को मिले विशेष वित्तीय अधिकार

​इस अधिसूचना की सबसे महत्वपूर्ण बात अधिकारियों को दिए गए वित्तीय अधिकार हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

  • प्रशासनिक स्वीकृति: संबंधित उपमंडल अधिकारी (नागरिक) यानी एसडीएम को 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के विकास कार्यों को मंजूरी देने के प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं।
  • त्वरित निर्णय: इससे छोटे और मध्यम स्तर के विकास कार्यों के लिए अब फाइलें लंबे समय तक राज्य मुख्यालय में लंबित नहीं रहेंगी। स्थानीय स्तर पर ही बजट और योजना को हरी झंडी मिल सकेगी।
  • समय सीमा: यह व्यवस्था आगामी सरकारी आदेशों तक या निकायों के पुनर्गठन तक प्रभावी रहेगी।
इन 47 शहरों की बदली कमान (प्रमुख नाम)

​सरकार द्वारा जारी सूची में प्रदेश के लगभग सभी जिलों के प्रमुख नगर निकाय शामिल हैं। प्रमुख शहरों की सूची इस प्रकार है:

जिलाशामिल नगर निकाय
बिलासपुरबिलासपुर, श्रीनयना देवी, घुमारवीं, तलाई
चंबाचंबा, डलहौजी, चुवाड़ी
हमीरपुरसुजानपुर टिहरा, नादौन, भोटा
कांगड़ाकांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर
कुल्लूकुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार
मंडीसुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग
शिमलारोहड़ू, रामपुर, ठियोग, सुन्नी, नारकंडा, चौपाल, कोटखाई, जुब्बल
सिरमौरनाहन, पांवटा साहिब, राजगढ़
सोलननालागढ़, परवाणु, अर्की
ऊनासंतोसगढ़, मैहतपुर-बसदेहरा, दौलतपुर-चौक, गगरेट, टाहलीवाल
विकास कार्यों पर क्या होगा असर?

​नगर निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति के बाद अब निम्नलिखित क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है:

  1. स्वच्छता अभियान: शहर की सफाई व्यवस्था के लिए आवश्यक उपकरणों और लेबर के भुगतान में देरी नहीं होगी।
  2. Infrastructure: वार्डों के भीतर छोटी गलियों, नालियों और सामुदायिक भवनों के मरम्मत कार्य को एसडीएम स्तर पर मंजूरी मिल सकेगी।
  3. स्ट्रीट लाइट और पेयजल: स्थानीय स्तर पर बिजली-पानी से जुड़ी छोटी समस्याओं के समाधान के लिए फंड्स का उपयोग सुगम होगा।
सरकार का सख्त रुख

​प्रदेश सरकार ने सभी जिलाधिकारियों (DC) और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का पालन तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी को मूलभूत सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसलिए अधिकारियों को सीधे जवाबदेह बनाया गया है।

​हिमाचल प्रदेश सरकार का यह कदम शहरी गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी माना जा रहा है। 1 से 5 लाख तक की वित्तीय शक्ति एसडीएम को देने से ‘विकेंद्रीकरण’ (Decentralization) को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह होगा कि धरातल पर ये अधिकारी कितनी तेजी से लंबित परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाते हैं।

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