मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना से 20,000 परिवारों को मिलेगा स्वरोजगार

Himachal

शिमला: हिमाचल प्रदेश, जिसे अब तक मुख्य रूप से ‘फल राज्य’ के रूप में जाना जाता था, अब मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। राज्य सरकार के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय और ‘मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना’ के प्रभावी कार्यान्वयन से प्रदेश में ‘नीली क्रांति’ की शुरुआत हो चुकी है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को उनके गांव में ही स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।

मछली उत्पादन में 2,000 मीट्रिक टन का इजाफा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है:

  • वर्ष 2022-23: 17,000 मीट्रिक टन उत्पादन।
  • वर्ष 2024-25: उत्पादन बढ़कर 19,000 मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। गोविंद सागर, पोंग डैम और कोल डैम जैसे विशाल जलाशयों में आधुनिक प्रबंधन और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने इस उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। वर्तमान में यह योजना बिलासपुर, मंडी, ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर और चंबा जिलों में सफलतापूर्वक चल रही है।
80% सब्सिडी के साथ युवाओं को मिल रहा संबल

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय बाधाओं को दूर किया है। योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  1. इकाई लागत: कार्प मछली पालन के लिए 12.40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत तय की गई है।
  2. भारी सब्सिडी: सरकार इस लागत पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है।
  3. छोटे मछली पालकों को राहत: 500 वर्ग मीटर की छोटी इकाइयों के लिए भी सरकार वित्तीय सहायता दे रही है।
नालागढ़ और पतलीकूहल में स्थापित होंगे अत्याधुनिक ब्रूड बैंक

मत्स्य पालन को वैज्ञानिक आधार देने के लिए प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे पर निवेश कर रही है:

  • नालागढ़ (सोलन): कार्प मछली ब्रूड बैंक की स्थापना।
  • पतलीकूहल (कुल्लू): ट्राउट मछली ब्रूड बैंक का निर्माण। प्रत्येक बैंक पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त हो सकें। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 5 हेक्टेयर नए तालाब बनाने हेतु 50 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट भी आवंटित किया है।
20,000 परिवारों के जीवन में खुशहाली

मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि सरकार का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। ‘मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना’ से न केवल प्रदेश के राजस्व में वृद्धि हो रही है, बल्कि इससे जुड़े 20,000 से अधिक परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।

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