सोलन (हिमालयन डॉन): केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सितंबर महीने के ड्रग अलर्ट ने गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश भर में 331 दवाओं और कॉस्मेटिक्स के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। इनमें सबसे चिंताजनक स्थिति हिमाचल प्रदेश की है, जहां के सर्वाधिक 95 सैंपल फेल हुए हैं। इसके बाद उत्तराखंड (69), महाराष्ट्र (23), मध्य प्रदेश (22) और हरियाणा (21) का नंबर है।
जांच में एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द-बुखार, बच्चों के सिरप, खांसी, पेट और आंखों की दवाओं के साथ-साथ इंजेक्शन और विटामिन उत्पादों के सैंपल फेल हुए हैं। ये दवाएं डिसाल्यूशन, स्टेरिलिटी, पीएच और एपीआई की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर विफल रही हैं।
विदेशों में बनी दवाइयां भी कटघरे में केवल स्वदेशी ही नहीं, विदेशों में निर्मित 12 उत्पादों के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। इनमें इटली के छह, पाकिस्तान के चार और थाईलैंड के दो सैंपल शामिल हैं।
हिमाचल और अन्य राज्यों के प्रमुख फेल उत्पाद:
- सोलन: फार्मारूट्स हेल्थकेयर का एलर्जी सिरप (सिट्राजिन प्लस एंब्रोक्सोल) और टीएंडजी मेडिकेयर का पोडोनेक्स 100 ड्राई सिरप।
- सिरमौर: ग्नोसिस फार्मास्युटिकल्स की मिर्गी की दवा (सोडियम वेल्पोरेट) और एमएमजी हेल्थकेयर का आउसनेट इंजेक्शन।
- अन्य राज्य: गुजरात के विमसन डेरमा का केटोकोनाजोल साबुन, महाराष्ट्र की हिंदुस्तान लैबोरेट्री की एस्प्रिन 150 एमजी, लुधियाना की बीएस-टॉप क्रीम और हरियाणा के आरके लाइफ केयर का कैफटन 1000 एमजी इंजेक्शन भी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
लगातार इतनी बड़ी संख्या में जीवनरक्षक दवाओं का फेल होना दवा निर्माण से जुड़ी गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।









रतन चंद जी नमस्कार🙏 'हिमालयन डान' के नए स्वरूप को सराहने और अपनी आत्मीय शुभकामनाएं भेजने के लिए हम आपका…