सोलन में स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती: बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट की मशीनरी हुई कबाड़, मरम्मत पर लगेगा 40 लाख का फटका

On: October 24, 2026 4:28 PM
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सोलन के सरकारी अस्पताल में धूल और जंग से खराब पड़ा ऑक्सीजन प्लांट, बिखरे हुए सिलेंडर और निरीक्षण करता हुआ स्टाफ (हिमालयन डॉन की रिपोर्ट)।
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हिमालयन डॉन संवाददाता | सोलन। जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में भारी लापरवाही के चलते लाखों रुपये का नुकसान सामने आया है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ऑक्सीजन प्लांट तो स्थापित कर दिए, लेकिन देखरेख के अभाव और प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब ये प्लांट सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। जिले के तीन प्रमुख अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट पिछले कई महीनों से बंद पड़े हैं, जिनमें से दो अस्पतालों की लाखों रुपये की मशीनरी पूरी तरह खराब हो चुकी है।

समय पर टेंडर जारी न होने के कारण परवाणू और नालागढ़ के ऑक्सीजन प्लांट काफी समय से बंद पड़े थे। अब जब इन्हें दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू की गई, तो मशीनों में बड़ी तकनीकी खराबियां सामने आई हैं। इन दोनों प्लांटों को दुरुस्त करने पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। अकेले नालागढ़ अस्पताल प्रशासन ने मरम्मत के लिए सरकार से 21.77 लाख रुपये का बजट मांगा है। ऐसे में मरीजों को अभी कई और महीने इस सुविधा के बिना गुजारने पड़ सकते हैं।

दूसरी ओर, जिला मुख्यालय स्थित क्षेत्रीय अस्पताल सोलन का ऑक्सीजन प्लांट भी धूल फांक रहा है। प्लांट लंबे समय से चालू न होने के कारण यहां रखी मशीनरी के भी खराब होने का अंदेशा बना हुआ है। बता दें कि इन तीनों प्रमुख अस्पतालों पर जिले की आधी से अधिक आबादी निर्भर है।

सिलिंडरों के सहारे जिंदगी की जंग

ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण इन अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को फिलहाल औद्योगिक क्षेत्र बद्दी से मंगवाए जा रहे महंगे सिलिंडरों के सहारे ही ऑक्सीजन दी जा रही है। इन अस्पतालों के वार्डों में रोजाना 30 से 40 ऐसे गंभीर मरीज भर्ती होते हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की सख्त जरूरत होती है। सिलिंडर खत्म होने पर तीमारदारों और अस्पताल स्टाफ को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। यदि समय पर सिलिंडरों की आपूर्ति नहीं होती है, तो मरीजों की जान पर भी संकट गहरा सकता है।

अधिकारियों का पक्ष: “विभाग की ओर से जल्द ही दोनों ऑक्सीजन प्लांटों की मरम्मत करवाई जाएगी। अस्पताल प्रशासन से प्लांटों की मरम्मत पर आने वाले खर्च का पूरा ब्योरा मांगा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द ही बजट जारी कर प्लांटों को सुचारू कर दिया जाएगा।” — डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), स्वास्थ्य विभाग, सोलन

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