सोलन। हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए मौसम को लेकर महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है। आगामी पांच दिनों में सोलन और आसपास के क्षेत्रों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने कृषि संबंधी एडवाइजरी जारी की है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को साफ मौसम का लाभ उठाते हुए रबी फसलों की बुवाई की तैयारियां तेज करने की सलाह दी है। वहीं, सेब बागवानों को बागीचों में साफ-सफाई और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
19 से 23 सितंबर तक मुख्यतः शुष्क रहेगा मौसम
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 19 से 23 सितंबर तक मौसम मुख्यतः साफ और शुष्क रहने की संभावना है। 18 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत हल्की बारिश हो सकती है।
इस अवधि में अधिकतम तापमान करीब 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। हवा की गति सामान्य रहने की संभावना है।
रबी फसलों की बुवाई की तैयारियां करें तेज
नौणी विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रबी सीजन की फसलों की सीधी बुवाई के लिए खेतों में क्यारियां तैयार करने की सलाह दी है।
इस मौसम में किसान पालक, अगेती मटर (आर्कल एवं वीएल-1), मेथी, धनिया, मूली और गाजर की बिजाई कर सकते हैं।
जिन किसानों की मक्के की फसल पककर तैयार हो चुकी है और भुट्टे भूरे हो गए हैं, उन्हें फसल की समय पर कटाई करने की सलाह दी गई है। कटाई के बाद मक्के को अच्छी तरह धूप में सुखाकर ही सुरक्षित स्थान पर भंडारित करने को कहा गया है।
टमाटर और कद्दूवर्गीय फसलों में कीटों से बचाव
टमाटर और कद्दूवर्गीय फसलों में हानिकारक कीटों की निगरानी करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने कीट नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने और संक्रमित फलों को खेत से निकालकर नष्ट करने का सुझाव दिया है।
सेब बागीचों में साफ-सफाई पर विशेष जोर
सेब उत्पादकों को बागीचों में हवा का उचित आवागमन बनाए रखने के लिए अनावश्यक झाड़ियों और खरपतवार की सफाई करने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा पौधों के थालों में गिरे हुए तथा रोगग्रस्त फलों को तुरंत इकट्ठा कर नष्ट करने को कहा गया है। इससे रोग और फंगस के संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।
पशुओं के टीकाकरण को लेकर भी सलाह
मानसून के दौरान और इसके बाद पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में पशुपालकों को खुरपका-मुंहपका (FMD) और ब्लैक क्वार्टर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाने की सलाह दी गई है।
प्राकृतिक खेती में इन उपायों की सलाह
प्राकृतिक खेती करने वाले किसान साफ मौसम के दौरान कीट नियंत्रण के लिए अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और दशपर्णी अर्क का उपयोग कर सकते हैं।
किसानों को खेतों में जलभराव से बचने के लिए नालियों की सफाई सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है।
मौसम की स्थानीय और ताजा जानकारी प्राप्त करने के लिए किसानों से ‘मेघदूत’ ऐप का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।









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