सेब बागवानों की बढ़ी चिंता, बारिश के दौरान तुड़ान और रसायनों के छिड़काव से बचने की सलाह; खेतों में जलभराव रोकने के निर्देश
सोलन, 11 अगस्त 2026, सोलन जिले में आने वाले दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय नौणी, सोलन की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने 13 और 14 अगस्त को जिले के कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं 11 से 15 अगस्त तक अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।
मौसम विभागीय पूर्वानुमान के अनुसार 12 अगस्त को करीब 12 मिमी, 13 और 14 अगस्त को 10-10 मिमी, 15 अगस्त को 15 मिमी और 16 अगस्त को 14 मिमी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
किसानों के लिए सबसे जरूरी चेतावनी
लगातार बारिश और अधिक नमी के कारण खेतों में जलभराव, मिट्टी का कटाव, फफूंदजनित रोग और खड़ी फसलों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करने और मेड़ों पर उगी खरपतवार व झाड़ियों को हटाकर हवा का संचार बेहतर बनाए रखने की सलाह दी है।
साथ ही बारिश के दौरान सभी फसलों में सिंचाई फिलहाल रोकने और वर्षा जल के संग्रहण की उचित व्यवस्था करने को कहा गया है। भारी बारिश के दौरान किसानों को नदियों, नालों और निचले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है।
सेब बागवानों के लिए अहम सलाह
सेब उत्पादकों के लिए मौसम को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार बादल और अधिक आर्द्रता की स्थिति में बागानों में किसी भी प्रकार के रसायन का छिड़काव न करने की सलाह दी गई है।
बारिश के दौरान या बारिश रुकने के तुरंत बाद सेब की तुड़ाई भी स्थगित रखने को कहा गया है। तुड़ाई के बाद फलों को छायादार और अच्छी हवा वाली जगह पर रखने की सलाह दी गई है, ताकि फल की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता बनी रहे।
टमाटर और शिमला मिर्च पर भी नजर रखें
टमाटर उत्पादकों को पक चुके फलों की समय पर तुड़ाई करने तथा बकआई रॉट और झुलसा रोग की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। रोग दिखाई देने पर संक्रमित पौधों या उनके हिस्सों को तुरंत खेत से निकालकर मिट्टी में दबाने को कहा गया है।
शिमला मिर्च में लगातार नमी और बादल वाले मौसम के कारण जड़ सड़न और तना सड़न का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए खेतों में पानी जमा न होने देने और अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
मक्का की फसल में पानी न रुकने दें
मक्का की फसल जलभराव के प्रति संवेदनशील है। खेत में पानी रुकने से जीवाणुजनित तना सड़न का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेतों में वर्षा का पानी जमा न होने देने और उचित जल निकासी व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए सीधी बात
13 और 14 अगस्त को भारी बारिश की संभावना को देखते हुए किसान अभी से खेतों और बागानों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त कर लें। सेब की तुड़ाई बारिश के दौरान न करें और बादल व अधिक नमी के समय रसायनों का छिड़काव करने से बचें।









रतन चंद जी नमस्कार🙏 'हिमालयन डान' के नए स्वरूप को सराहने और अपनी आत्मीय शुभकामनाएं भेजने के लिए हम आपका…