शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर बड़ा और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि एक ही इलाके में बार-बार नजदीकी स्कूलों में तबादला करवाकर लंबे समय तक जमे रहने वाले कर्मचारी अब नियमों का फायदा नहीं उठा सकेंगे। ऐसे मामलों में 30 किलोमीटर के दायरे के भीतर की गई पूरी सेवा अवधि को जोड़कर कुल कार्यकाल माना जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने कहा कि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा ट्रांसफर नीति के दुरुपयोग को रोकने के लिए शिक्षा विभाग की यह व्यवस्था पूरी तरह उचित और तर्कसंगत है।
10 साल तक 8-10 किलोमीटर के दायरे में ही रहे शिक्षक
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछले करीब 10 वर्षों से जिला सिरमौर में ही 8 से 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित पांवटा साहिब, अजौली और शिवपुर जैसे स्कूलों में सेवाएं देता रहा। अदालत ने माना कि लगातार नजदीकी स्थानों पर तबादले लेकर एक ही क्षेत्र में बने रहना ट्रांसफर नीति की भावना के विपरीत है।
30 किलोमीटर के भीतर की सेवा मानी जाएगी एक ही स्टेशन
हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के 27 अक्टूबर 2023 के कार्यालय ज्ञापन को वैध ठहराते हुए कहा कि 30 किलोमीटर के दायरे में बिताई गई सेवा अवधि को एक ही स्टेशन पर कार्यकाल माना जाएगा। इसलिए कर्मचारियों के कुल कार्यकाल की गणना करते समय इस अवधि को जोड़ना पूरी तरह सही है।
ट्रांसफर नीति का दुरुपयोग नहीं चलेगा
खंडपीठ ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी बार-बार छोटे-छोटे तबादले करवाकर एक ही क्षेत्र में वर्षों तक न टिके रहें। इससे दूरस्थ और जरूरत वाले स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी।
याचिका खारिज, तबादला बरकरार
याचिकाकर्ता का तबादला 27 अप्रैल 2026 को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिवपुर से कफोटा किया गया था। शिक्षक ने यह कहते हुए तबादले को चुनौती दी कि शिवपुर में उसका कार्यकाल केवल 11 महीने का था। हालांकि हाईकोर्ट ने माना कि पिछले नजदीकी स्टेशनों का कार्यकाल भी जोड़ा जाएगा और इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।
इस फैसले का क्या होगा असर?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब शिक्षा विभाग में एक ही क्षेत्र के भीतर बार-बार तबादला लेकर वर्षों तक जमे रहने की रणनीति पर रोक लग सकती है। भविष्य में ट्रांसफर के मामलों में कर्मचारियों के 30 किलोमीटर के दायरे के भीतर की पूरी सेवा अवधि को ध्यान में रखा जाएगा, जिससे दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को बल मिलेगा।








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