बहू नहीं, बेटी बनाकर विदा किया… हिमाचल के परिवार ने जीत लिया हर दिल

On: July 12, 2026 10:33 AM
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कांगड़ा के शाहपुर में सास-ससुर द्वारा विधवा बहू का कन्यादान करते हुए भावुक दृश्य।
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शाहपुर (कांगड़ा)। आज के समय में जहां रिश्तों के मायने अक्सर बदलते नजर आते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल के चंमडेरा गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने मानवता, अपनत्व और परिवार की असली परिभाषा को जीवंत कर दिया है। यहां एक सास-ससुर ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा देते हुए उसका पुनर्विवाह कराया और स्वयं कन्यादान कर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की। वहीं, बहू के देवरों ने भी भाई का फर्ज निभाते हुए उसे पूरे सम्मान और स्नेह के साथ विदा किया।

करीब डेढ़ वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में रंजना के पति राजिंद्र कुमार का असामयिक निधन हो गया था। पति के निधन के बाद रंजना के जीवन में कठिन दौर शुरू हो गया। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में उसके ससुर ईश्वर दास और सास विमला देवी ने उसे अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने बहू को बेटी की तरह संभाला, उसका हौसला बढ़ाया और उसके भविष्य को सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया।

समाज की पुरानी सोच और रूढ़ियों से ऊपर उठते हुए परिवार ने रंजना के पुनर्विवाह का फैसला किया। दो दिन पहले एक मंदिर में पूरे रीति-रिवाज और पारिवारिक सम्मान के साथ उसका विवाह संपन्न कराया गया। सबसे भावुक क्षण तब आया जब सास-ससुर ने स्वयं बेटी की तरह उसका कन्यादान किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

रंजना के देवर इंद्र कुमार और सुरेंद्र पाल ने भी बड़े भाई का दायित्व निभाते हुए विवाह की सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। विदाई के समय उन्होंने अपनी भाभी को घरेलू उपयोग का सामान भेंट किया और पूरे सम्मान के साथ नए जीवन की ओर विदा किया। परिवार का यह अपनापन हर किसी के दिल को छू गया।

चंमडेरा गांव के इस परिवार ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की मजबूती केवल खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता से बनती है। ऐसे समय में, जब समाज में रिश्तों के टूटने की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, शाहपुर के इस परिवार ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है जो लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

यह घटना केवल एक पुनर्विवाह की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच को बदलने का संदेश भी है, जिसमें विधवा महिलाओं के जीवन को अक्सर सीमाओं में बांध दिया जाता है। ईश्वर दास, विमला देवी और उनके परिवार ने अपने इस निर्णय से यह दिखा दिया कि यदि सोच सकारात्मक हो तो हर बेटी को सम्मान और नया जीवन मिल सकता है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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