विशेष रिपोर्ट: धागों में बुनी विरासत, प्रशासन ने दी नई पहचान—हिम MSME फेस्ट में दिखा ‘हिमाचली शॉल’ का गौरव

On: January 6, 2026 8:31 PM
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शिमला | जब हुनर को सही नेतृत्व और मंच मिलता है, तो परंपराएँ इतिहास रचती हैं। शिमला में आयोजित ‘हिम एमएसएमई फेस्ट’ (Him MSME Fest) में सजी रंग-बिरंगी शॉलें केवल ऊन और डिज़ाइन का संगम नहीं थीं, बल्कि वे हिमाचल के 12 जिलों के प्रशासनिक समर्पण और कारीगरों के पसीने की एक साझा दास्तान थीं।

उद्योग विभाग के महाप्रबंधकों (GMs) के सामूहिक नेतृत्व ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर सरकारी तंत्र और सांस्कृतिक विरासत एक साथ मिल जाएं, तो ‘वोकल फॉर लोकल’ का सपना कैसे साकार होता है।

ज़िलों की विरासत: एक नज़र महाप्रबंधकों की दूरदर्शिता पर

फेस्ट में हर ज़िले की शाल ने अपनी एक अलग कहानी कही, जिसे वहां के नेतृत्व ने बखूबी संजोया था:

ज़िलानेतृत्व (महाप्रबंधक)मुख्य विज़न / संदेश
शिमलासंजय कंवरशिमला की शाल पहाड़ की गरिमा और सादगी का प्रतीक है।
कांगड़ाओम प्रकाश जरयालशालों के धागों में कांगड़ा की चित्रकला की आत्मा को जीवित करना।
कुल्लूराजेश शर्माकुल्लू शाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही सम्मान और संदर्भ दिलाना।
बिलासपुर व मंडीजी. आर. अभिलाषीहथकरघा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना।
सोलनसुरेन्द्र कुमारपारंपरिक शालों को आधुनिक बाज़ार की मांग के अनुसार नवाचार (Innovation) देना।
सिरमौरविनीत शर्मासिरमौर की शालों का टिकाऊपन और उनकी सहज सादगी।
किन्नौरजी. एल. नेगीदुर्गम ऊँचाइयों की कठोरता और सुंदरता को डिज़ाइन में उतारना।

प्रशासनिक तालमेल: पर्दे के पीछे के सूत्रधार

इस पूरे आयोजन को एक साझा मंच पर लाने और ज़िला-स्तरीय प्रयासों को एक सूत्र में पिरोने का काम शिमला के प्रबंधक विकास गोवर्धन दास ने किया। उन्होंने बताया कि जब सभी ज़िलों की मेहनत एक मंच पर आती है, तभी असली ‘सशक्त हिमाचल’ की तस्वीर दिखाई देती है।


क्यों खास रहा यह प्रयास?

  1. सांस्कृतिक साझेदारी: यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और प्रशासन के बीच एक मजबूत साझेदारी का प्रतीक थी।
  2. आजीविका को बल: महाप्रबंधकों ने सीधे तौर पर बुनकरों को बाज़ार से जोड़ा, जिससे उनकी आय और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।
  3. ब्रांडिंग: ‘हिमाचली शॉल’ को एक वैश्विक उत्पाद के रूप में पेश करने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम रहा।

“विकास तब टिकाऊ होता है, जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा हो।” > फेस्ट का यह संदेश हर हिमाचली के मन में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव जगा गया।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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