शिमला | हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU), शिमला ने विधि शिक्षा और मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए ‘6वीं राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता, 2026’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में देश भर के प्रतिष्ठित विधि संस्थानों ने अपनी तर्कशक्ति और कानूनी समझ का प्रदर्शन किया।
न्यायिक दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ फाइनल मुकाबला
प्रतियोगिता का अंतिम दौर बौद्धिक कौशल का उत्कृष्ट संगम रहा। फाइनल राउंड की पीठ में न्यायिक जगत की नामचीन हस्तियां शामिल रहीं, जिनमें शामिल थे:
- माननीय न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल (न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय)
- माननीय न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा (न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय)
- माननीय न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा (न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय)
- प्रो. (डॉ.) विजेंद्र कुमार (कुलपति, MNLU, नागपुर)
- श्री पीयूष वर्मा (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष, एचपी हाई कोर्ट बार एसोसिएशन)
कड़े मुकाबले में मोहाली ने मारी बाजी
इस वर्ष प्रतियोगिता में देश भर के 74 विधि संस्थानों ने पंजीकरण कराया था। कड़े मेमोरियल राउंड और ऑनलाइन प्रारंभिक दौर के बाद, केवल 8 सर्वश्रेष्ठ टीमें ही शिमला स्थित विश्वविद्यालय परिसर में क्वार्टर-फाइनल के लिए चयनित हुईं।
सेमीफाइनल की बाधा पार करने के बाद, खिताबी भिड़ंत आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ (AIL), मोहाली और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन लॉ, तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के बीच हुई। गहन कानूनी बहस और प्रति-तर्कों के बाद, आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, मोहाली को विजेता घोषित किया गया।
पुरस्कारों की बौछार
विजेताओं को नकद पुरस्कार और ‘सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस’ से नवाजा गया:
| श्रेणी | विजेता | पुरस्कार राशि |
|---|---|---|
| विजेता टीम | आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, मोहाली | ₹ 60,000 |
| रनर-अप टीम | स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन लॉ, तमिलनाडु | ₹ 40,000 |
| सर्वश्रेष्ठ रिसर्चर | — | ₹ 20,000 |
| सर्वश्रेष्ठ टीम (याचिकाकर्ता/प्रतिवादी) | — | ₹ 15,000 (प्रत्येक) |
| सर्वश्रेष्ठ वक्ता (पुरुष/महिला) | — | ₹ 10,000 (प्रत्येक) |
नेतृत्व और मार्गदर्शन
विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के कुशल नेतृत्व में यह आयोजन संपन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) विजेंद्र कुमार ने छात्रों को संबोधित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में सेंटर फॉर क्लिनिकल लीगल एजुकेशन के निदेशक प्रो. (डॉ.) गिरिजेश शुक्ला और मूट कोर्ट समिति की अध्यक्षा डॉ. शैफाली दीक्षित की अहम भूमिका रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने NHRC के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल छात्रों के वकालत कौशल में निखार आता है, बल्कि मानवाधिकारों जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा को भी बल मिलता है।
रिपोर्ट: ब्यूरो, हिमालयन डॉन
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