हिमाचल पंचायत चुनाव: क्या समय पर नहीं होंगे इलेक्शन? हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार

On: January 4, 2026 8:51 AM
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है। हाईकोर्ट में शुक्रवार को हुई मैराथन सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई। कोर्ट ने सरकार की तैयारियों पर ऐसी टिप्पणी की है, जो अब चर्चा का विषय बन गई है।

​⚖️ ‘सरकार खुद को अपाहिज महसूस कर रही’ – हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

​सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “ऐसा लगता है जैसे राज्य सरकार पंचायत चुनाव कराने में खुद को अपाहिज महसूस कर रही है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है और इसमें देरी लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।

​⏳ सरकार ने क्यों मांगा 6 महीने का समय?

​राज्य सरकार ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि:

  • ​जिला परिषदों और पंचायतों के पुनर्सीमांकन (Delimitation) की अधिसूचना को दूसरी बेंच ने निरस्त कर दिया है।
  • ​लोगों को आपत्तियां दर्ज करने के लिए 10 जनवरी तक का वक्त दिया गया है।
  • ​इन नियमों और परिस्थितियों के चलते चुनाव करवाने के लिए कम से कम 6 महीने का अतिरिक्त समय चाहिए।
  • ​सरकार ने हिमाचल में आई प्राकृतिक आपदा का भी हवाला दिया।

​🚫 “सरकार जानबूझकर कर रही आनाकानी” – याचिकाकर्ता के वकील

​दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार चुनाव टालने के बहाने ढूंढ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस अधिसूचना के रद्द होने की बात सरकार कर रही है, वह मुख्य रूप से जिला परिषद शिमला से संबंधित है, तो पूरे प्रदेश के चुनाव क्यों रोके जा रहे हैं?

अब आगे क्या होगा? (Key Highlights)

स्थितिविवरण
अगली सुनवाईअब यह मामला मंगलवार को सुना जाएगा।
बेंच का बदलावन्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ अब मामले की सुनवाई करेगी।
नियम 9(2) का पेंचकोर्ट ने पहले ही परिसीमन से जुड़े संशोधित नियम 9(2) को ‘अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक’ बताकर खारिज कर दिया था।

🗳️ क्यों फंसा है पेंच?

​दरअसल, 5 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने पंचायती राज एक्ट के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था जिसमें पंचायत समिति क्षेत्रों को जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्र बनाने की इकाई माना गया था। कोर्ट ने इसे “मनमाना और अतार्किक” करार दिया था। अब सारा दारोमदार मंगलवार को होने वाली सुनवाई पर टिका है कि क्या हिमाचल के ग्रामीणों को समय पर नई पंचायतें मिलेंगी या अभी लंबा इंतजार करना होगा।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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