सेब रोग प्रबंधन नौणी यूनिवर्सिटी सोलन

सेब की फसल को बचाने की बड़ी पहल: अल्टरनेरिया व मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों पर पाँच जिलों में जागरूकता अभियान शुरू

Solan

नौणी, 10 फरवरी 2026। हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के पाँच प्रमुख सेब उत्पादक जिलों में व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिकों की आठ टीमें मैदान में उतरकर सीधे बागवानों से संवाद कर रही हैं।

इस अभियान के तहत शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा और मंडी जिलों के उन क्षेत्रों को चुना गया है, जिन्हें इन पर्ण रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील माना गया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य सेब उत्पादकों को रोगों की समय पर पहचान, वैज्ञानिक प्रबंधन और सही रोकथाम उपायों की जानकारी देना है, ताकि उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

वैज्ञानिक संस्थानों और बागवानी विभाग का संयुक्त प्रयास
जागरूकता अभियान में विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिकों के साथ-साथ मशोबरा, बजौरा और शार्बो (किन्नौर) स्थित क्षेत्रीय उद्यान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्रों, शिमला, सोलन, चंबा और किन्नौर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) तथा बागवानी विभाग के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह संयुक्त प्रयास राज्य में सेब उत्पादन को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

10 से 19 फरवरी तक चलेगा विशेष अभियान
यह विशेष जागरूकता अभियान 10 से 19 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान वैज्ञानिक टीमें सेब बागानों का मैदानी निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के प्रारंभिक लक्षण, रोग फैलने के कारण तथा वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित नियंत्रण उपायों के बारे में जानकारी दे रही हैं।
मैदानी भ्रमण, किसानों से सीधा संवाद और स्थल पर प्रदर्शन के माध्यम से यह समझाया जा रहा है कि समय रहते रोग की पहचान कर सही प्रबंधन अपनाने से भारी नुकसान से बचा जा सकता है।

रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध प्रयोग पर लगेगी रोक
वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी समझाया कि बिना सलाह के रासायनिक दवाओं का अत्यधिक और गलत उपयोग न केवल खर्च बढ़ाता है, बल्कि रोगों की गंभीरता भी बढ़ा सकता है। अभियान का उद्देश्य समेकित रोग प्रबंधन प्रणाली (IPM) को बढ़ावा देना है, जिससे रोग चक्र को तोड़ा जा सके और बागानों की सेहत लंबे समय तक बनी रहे।

शिमला सहित अन्य जिलों में टीमें सक्रिय
शिमला जिले में मंगलवार को चार वैज्ञानिक टीमें सक्रिय रहीं, जिन्होंने बागी, रतनारी, कलबोग, शीलघाट, नकरारी, चियोग, तियाली, कांद्रू और भराणा जैसे प्रमुख क्षेत्रों का दौरा किया। 11 फरवरी को चैथला, धारोंक, टिक्कर, करचारी, संधू, शिलारू, थानेधार और खनेटी क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। किन्नौर जिले में निचार और सुंगरा क्षेत्रों को कवर किया गया, जबकि 11 फरवरी को बारी और पोंडा क्षेत्रों में कार्यक्रम होंगे। चंबा जिले में भरमौर क्षेत्र में अभियान चलाया गया है और बुधवार को होली क्षेत्र में गतिविधियां होंगी। कुल्लू जिले में गड़सा घाटी में जागरूकता अभियान आयोजित किया गया, वहीं मणिकर्ण घाटी में 11 और 12 फरवरी को कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। मंडी जिले में संगलवाड़ा और धीम कटारू क्षेत्रों में अभियान चलाया गया, जबकि जंजैहली और तुंगधार क्षेत्रों में 11 फरवरी को टीमें पहुंचेंगी।

सेब उत्पादन और बागवानों की आय बढ़ाने पर फोकस
इस जागरूकता अभियान का अंतिम लक्ष्य किसानों की रोग प्रबंधन से जुड़ी समझ को मजबूत करना, सेब उत्पादन को सुरक्षित और टिकाऊ बनाना तथा प्रदेश के बागवानों की आजीविका में सुधार करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान समय पर सही जानकारी अपनाएं, तो इन रोगों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह भी पढ़ें:- 12 फरवरी को फिर जुटेगी सुक्खू कैबिनेट, RDG संकट पर बड़े फैसलों की तैयारी

i

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *