शिमला | हिमालयन डॉन, हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार राज्य में ‘प्राकृतिक खेती’ को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज कृषि विभाग की आगामी योजनाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2026 के भीतर प्रदेश के एक लाख नए किसानों को प्राकृतिक खेती की पद्धति से जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
खेती की नई तस्वीर: आंकड़ों की नज़र से
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सक्रियता का ही परिणाम है कि प्राकृतिक खेती का दायरा प्रदेश की 99.3 प्रतिशत पंचायतों तक पहुंच चुका है। वर्तमान में राज्य की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- कुल लाभांवित परिवार: 2,22,893 किसान एवं बागवान परिवार।
- कुल क्षेत्रफल: 38,437 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक विधि से खेती।
- पंजीकरण व प्रमाणीकरण: 2 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से 1.98 लाख को प्रमाण-पत्र दिए जा चुके हैं।
“प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि यह खेती की लागत को कम कर किसानों के मुनाफे को बढ़ाती है। हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” — ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी: देश में सबसे आगे हिमाचल
किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक उत्पादों पर देश में सर्वाधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित किया है। संशोधित दरें निम्न प्रकार हैं:
| फसल | पुराना मूल्य (प्रति किलो) | नया मूल्य (प्रति किलो) |
|---|---|---|
| प्राकृतिक गेहूं | ₹60 | ₹80 |
| मक्का | ₹40 | ₹50 |
| जौ (पांगी घाटी) | ₹60 | ₹80 |
| प्राकृतिक हल्दी | ₹90 | ₹150 |
| अदरक (नया शामिल) | – | ₹30 |
इसके साथ ही, दूध के खरीद मूल्य में भी वृद्धि की गई है, जहां गाय का दूध ₹61 और भैंस का दूध ₹71 प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है।
’हिम’ ब्रांड से मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि किसानों को बाजार में बेहतर पहुंच दिलाने के लिए प्राकृतिक मक्का और गेहूं के आटे की मार्केटिंग ‘हिम’ (HIM) ब्रांड के तहत की जा रही है। इससे किसानों के उत्पादों को विशेष पहचान मिलेगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद उपलब्ध होंगे।
पांगी बना प्रदेश का पहला प्राकृतिक उपमंडल
राज्य सरकार की इस मुहिम में पांगी उपमंडल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसे प्रदेश का पहला पूर्णतः प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ के तहत अब रासायनिक उर्वरकों के बजाय देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और स्थानीय वनस्पतियों के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
अर्थव्यवस्था की रीढ़ है कृषि
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि हिमाचल की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और लगभग 53.95 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए सीधे कृषि पर निर्भर हैं। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस क्षेत्र का योगदान 14.70 प्रतिशत है, जिसे देखते हुए सरकार निरंतर प्रगतिशील नीतियां लागू कर रही है।
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