पांगी के मनरेगा मजदूर के बेटे और किसान की बेटी ने पहले ही प्रयास में पास की UGC-NET

On: February 5, 2026 4:54 PM
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Success story of Anil and Aditi from Pangi Chamba clearing UGC NET exam
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पांगी (चंबा) वीरू राणा | हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की सुदूर और दुर्गम पांगी घाटी, जो अक्सर भारी बर्फबारी और कठिन जीवन के लिए जानी जाती है, आज अपनी एक नई पहचान बना रही है। यहाँ की मिट्टी के दो लाल-लाली ने अपनी मेहनत से साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। पांगी के अनिल कुमार और अदिति ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक UGC-NET को अपने पहले ही प्रयास में पास कर इतिहास रच दिया है।

पिता मनरेगा मजदूर, बेटे ने फावड़े की जगह कलम से लिखी तकदीर

पांगी की ग्राम पंचायत करयास के झलवास गांव के रहने वाले अनिल कुमार की सफलता की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। अनिल के पिता चंद्रमणी घर चलाने के लिए मनरेगा में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी, लेकिन पिता ने पसीना बहाकर बेटे की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।

अनिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से और ग्रेजुएशन सरकारी कॉलेज पांगी से पूरी की। बिना किसी महंगी कोचिंग के, केवल अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की। अनिल का सपना केवल नौकरी पाना नहीं है, बल्कि वे एक वैज्ञानिक बनकर समाज के पिछड़े वर्ग के लिए काम करना चाहते हैं।

अदिति की ‘लाइब्रेरी वाली तपस्या’ लाई रंग

पांगी के ही हुडान गांव की अदिति ने भी इस परीक्षा को पास कर बेटियों का मान बढ़ाया है। उनके पिता संगत राम एक साधारण किसान हैं। किलाड़ स्कूल और पांगी कॉलेज से पढ़ाई के बाद अदिति ने हार नहीं मानी और धर्मशाला की लाइब्रेरी में पिछले दो सालों तक दिन-रात कड़ी तपस्या की। आज उनकी मेहनत का फल उन्हें नेट सर्टिफिकेट के रूप में मिला है। अदिति ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के अटूट विश्वास को दिया है।


UGC-NET पास करने के बाद अब मिलेंगे ये बड़े फायदे

यूजीसी नेट परीक्षा पास करने के बाद इन दोनों युवाओं के लिए करियर के शानदार रास्ते खुल गए हैं:

  • असिस्टेंट प्रोफेसर: अब ये दोनों देश के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और लेक्चरर के पद के लिए पात्र हो गए हैं।
  • रिसर्च फेलोशिप (JRF): जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) क्वालिफाई करने पर पीएचडी के दौरान सरकार की ओर से हर महीने भारी-भरकम Stipend (वित्तीय सहायता) मिलती है।
  • SRF के अवसर: भविष्य में इन्हें सीनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए आवेदन करने का भी मौका मिलेगा।
  • प्रतिष्ठित नौकरियां: नेट सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के रिसर्च संस्थानों में उच्च पदों पर नौकरी प्राप्त की जा सकती है।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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