महंगाई का ‘डोज’: 1 अप्रैल से महंगी हो जाएंगी 800 से ज्यादा जरूरी दवाएं, जेब पर बढ़ेगा बोझ

On: March 30, 2026 8:00 AM
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Medicine price hike India April 2026 NPPA essential drugs NLEM list costlier
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शिमला | हिमालयन डॉन, नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम जनता को महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है। 1 अप्रैल से देश में बुखार, संक्रमण, दर्द और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 800 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में बदलाव के आधार पर इन दवाओं के दाम बढ़ाने की हरी झंडी दे दी है।

​कौन सी दवाएं होंगी महंगी?

​NPPA के आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में 0.64956% तक की वृद्धि की अनुमति दी गई है। इसमें निम्नलिखित श्रेणियों की दवाएं शामिल हैं:

  • ​सामान्य दवाएं: पैरासिटामोल (बुखार), विभिन्न एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर।
  • ​गंभीर बीमारियां: हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (BP) और संक्रमण की दवाएं।
  • ​सप्लीमेंट्स: एनीमिया की दवाएं, विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स।
  • ​अन्य: स्टेरॉयड और जीवन रक्षक दवाएं।

​क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

​दवा निर्माताओं के अनुसार, पिछले कुछ समय में दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (API – एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्रेडिएंट्स) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

  • ​कच्चा माल: एपीआई की कीमतों में 30 से 35% तक का उछाल आया है।
  • ​विशेष सामाग्री: पैरासिटामोल के कच्चे माल में 25% और ग्लिसरीन में 64% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • ​पैकेजिंग: एल्युमीनियम फॉयल और प्लास्टिक जैसी पैकेजिंग सामग्री की लागत भी करीब 40% तक बढ़ गई है।

​”पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक अस्थिरता के कारण लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की आपूर्ति महंगी हुई है, जिससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है।” — फार्मा उद्योग विशेषज्ञ

​आम आदमी पर क्या होगा असर?

​हालांकि, प्रतिशत के लिहाज से यह वृद्धि (0.64%) बहुत कम लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उन परिवारों पर इसका सीधा वित्तीय बोझ पड़ेगा जहाँ बुजुर्ग या क्रॉनिक (लंबे समय से बीमार) मरीज हैं, जिन्हें नियमित रूप से दवाएं लेनी पड़ती हैं।

​फार्मा उद्योग की मांग: “यह राहत नाकाफी”

​दवा कंपनियों और उद्योग संगठनों का कहना है कि लागत में 30-40% की बढ़ोतरी के मुकाबले 1% से भी कम की मूल्य वृद्धि बहुत ही सीमित है। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल और पैकेजिंग के बढ़ते खर्च को देखते हुए सरकार को आने वाले समय में कीमतों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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