हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला | हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के लोक प्रशासन विभाग में हाल ही में ज्योतिबा फुले की जीवनी पर आयोजित एक सत्र को लेकर विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को विभाग के छात्रों ने डीन ऑफ स्टडीज से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने छात्र संगठन एबीवीपी (ABVP) द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक करार दिया है।
क्या है पूरा मामला? बीते 23 अप्रैल को लोक प्रशासन विभाग द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन और उनके योगदान पर एक विशेष शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया था। इस सत्र के बाद छात्र संगठन एबीवीपी ने विभाग के अधिकारियों का घेराव किया और आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान हिंदू धर्म की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया है। संगठन ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस सत्र के खिलाफ प्रचार किया।
छात्रों का पलटवार: ‘अकादमिक चर्चा को बदनाम करने की कोशिश’ आज डीन ऑफ स्टडीज को सौंपे गए ज्ञापन में छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे सत्र के दौरान वहां व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। छात्रों का कहना है कि यह सत्र पूरी तरह से अकादमिक, बौद्धिक और खुली चर्चा के दायरे में आयोजित किया गया था। छात्रों ने आरोप लगाया कि मीडिया के कुछ वर्गों और सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही खबरें तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की एक जानबूझकर की गई कोशिश है, जिसका उद्देश्य अनावश्यक विवाद पैदा करना है।
ज्ञापन की मुख्य बातें:
- निराधार आरोप: छात्रों ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की बात न केवल झूठ है, बल्कि यह उच्च शिक्षा के मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास है।
- अकादमिक स्वतंत्रता पर खतरा: छात्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय स्वतंत्र विचार और बहस की जगह हैं। बाहरी दबाव के माध्यम से अकादमिक चर्चाओं को प्रभावित करना प्रतिगामी कदम है।
- कड़ी कार्रवाई की मांग: छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि झूठी अफवाहें फैलाने और शैक्षणिक माहौल खराब करने वाले संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- प्रशासन को चेतावनी: छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आगाह किया कि वे किसी भी बाहरी दबाव या असत्यापित दावों के आधार पर जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रियावादी निर्णय न लें, क्योंकि इससे संस्थान की अखंडता और स्वायत्तता को नुकसान पहुँचेगा।
छात्रों ने अंत में जोर देते हुए कहा कि वे संवैधानिक मूल्यों और तर्कसंगत विमर्श के साथ मजबूती से खड़े हैं और रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियों को पटरी से उतारने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे।
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