शिमला | हिमालयन डॉन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) परिसर मंगलवार को नारों की गूँज से दहल उठा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की विश्वविद्यालय इकाई ने प्रदेश सरकार और प्रशासन की ‘छात्र विरोधी’ नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण, भारी फीस वृद्धि और पीजीटी (PGT) पदों पर की जा रही अस्थाई भर्तियों के विरोध में आयोजित किया गया।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए इकाई सचिव सुशील शर्मा ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बडे़ दावे करती है, वहीं दूसरी ओर पीजीटी जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक पदों पर अस्थाई भर्तियां कर रही है। एबीवीपी ने मांग की है कि ये नियुक्तियां केवल नियमित आधार पर होनी चाहिए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं का सम्मान सुरक्षित रहे।
फीस वृद्धि को बताया ‘शिक्षा का बाजारीकरण’
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में की गई फीस वृद्धि पर कड़ा ऐतराज जताते हुए छात्र नेताओं ने इसे आम छात्रों की पहुंच से शिक्षा को दूर करने की साजिश करार दिया। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस नहीं लिया और अस्थाई भर्ती प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, तो आने वाले समय में छात्र आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
विद्यार्थी परिषद की मुख्य मांगें:
- विश्वविद्यालय में की गई फीस वृद्धि को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।
- पीजीटी पदों पर ‘अस्थाई भर्ती’ (Temporary Recruitment) को रद्द कर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- छात्र हितों की अनदेखी करने वाले प्रशासनिक रवैये में सुधार लाया जाए।
आज के इस विरोध प्रदर्शन में परिसर के सैकड़ों छात्रों ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस बल भी एहतियात के तौर पर तैनात रहा, लेकिन छात्रों का आक्रोश थमता नहीं दिख रहा है।
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