शिमला | 01 जनवरी, 2026
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हज़ारों छात्रों के लिए राहत की बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने नए साल 2026 में शिक्षा व्यवस्था को नई संजीवनी देने की तैयारी कर ली है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आगाज से पहले प्रदेश भर के स्कूलों में 5,450 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा मंत्री के कड़े निर्देश: समय पर पूरी हो भर्ती
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि भर्ती और पदोन्नति (Promotion) से जुड़ी तमाम फाइलों को युद्ध स्तर पर निपटाया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि नया सत्र शुरू होने से पहले कोई भी क्लास बिना शिक्षक के न रहे।
प्रशासनिक ढांचा होगा मजबूत
स्कूलों में अनुशासन और बेहतर प्रबंधन के लिए रिक्त पड़े उच्च पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है:
- प्रिंसिपल के 825 पद: शिक्षा सचिव राकेश कंवर की अध्यक्षता में बनी विशेष कमेटी इन पदों को पदोन्नति के जरिए भरेगी। इसमें 50% कोटा मुख्याध्यापकों के लिए और 50% प्रवक्ताओं के लिए आरक्षित होगा।
- मुख्याध्यापक (Headmaster): विभाग में खाली पड़े 247 पदों पर जल्द ही नई नियुक्तियां देखने को मिलेंगी।
- प्राथमिक शिक्षा: बुनियादी शिक्षा में सुधार के लिए 218 केंद्र मुख्य शिक्षक (CHT) और 598 मुख्य शिक्षक (HT) के पदों को भरने की मंजूरी दी गई है।
टीजीटी और प्रवक्ताओं की बड़ी खेप
विभाग ने टीजीटी और प्रवक्ता श्रेणियों के लिए रिक्तियों का विस्तृत ब्यौरा जारी किया है:
- टीजीटी (1318 पद): इसमें आर्ट्स के 510, नॉन-मेडिकल के 538 और मेडिकल के 270 पद शामिल हैं।
- प्रवक्ता (स्कूल न्यू): 658 पदों पर सीधी भर्ती और 400 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
C&V कैडर: कोर्ट के फैसले का इंतज़ार
कला, भाषा और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पद भरे जा रहे हैं। हालांकि, कुछ तकनीकी बाधाएं भी हैं:
- शास्त्री (737 पद) और पीईटी (870 पद): इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मामला सर्वोच्च और उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण नियुक्तियां फिलहाल रुकी हुई हैं।
- अन्य पद: कला अध्यापक (339), भाषा अध्यापक (31+13) और पंजाबी शिक्षकों (17) की भर्ती प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी है।
छात्रों को मिलेगा बेहतर भविष्य
इस व्यापक भर्ती अभियान से न केवल प्रदेश की बेरोजगारी कम होगी, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर भी निजी स्कूलों के समकक्ष लाने में मदद मिलेगी। शिक्षा विभाग के इस कदम को हिमाचल प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में एक ‘ऐतिहासिक बदलाव’ के तौर पर देखा जा रहा है।
