हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला | हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) का प्रांगण कल से भारत की बहुरंगी संस्कृति और लोक परंपराओं के रंगों में सराबोर होने जा रहा है। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ का दो दिवसीय आयोजन कल से शुरू होगा। भारतीय छात्र संघ (SFI) की विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आयोजित यह उत्सव न केवल मनोरंजन, बल्कि छात्र एकजुटता और वैचारिक गहराई का एक सशक्त प्रतीक माना जाता है।
लुप्त होती लोक कलाओं को मिलेगा नया जीवन
आधुनिकता की चकाचौंध में जहां पारंपरिक कलाएं और वाद्ययंत्र धीरे-धीरे ओझल हो रहे हैं, वहीं SFI का यह मंच उन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ हिमाचल के विभिन्न जिलों की लोक परंपराओं के साथ-साथ विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे अन्य राज्यों के छात्र भी अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन सही मायने में विश्वविद्यालय परिसर को एक ‘लघु भारत’ के रूप में प्रस्तुत करता है।
वैचारिक प्रतिरोध और सामाजिक समरसता
आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं है। आज के दौर में जब विभाजनकारी ताकतें समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं, यह मंच ‘अनेकता में एकता’ के भारतीय विचार को पुख्ता करता है। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के संकुचित दायरे से निकलकर एक समावेशी समाज और सामाजिक समरसता का संदेश देने की एक कोशिश है।
गौहर रज़ा होंगे मुख्य अतिथि
उत्सव के पहले दिन देश के प्रसिद्ध लेखक, वैज्ञानिक, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता गौहर रज़ा मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनकी उपस्थिति छात्रों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और कला के माध्यम से सामाजिक बदलाव लाने के विषय पर चर्चा को नई दिशा देगी।
मुख्य आकर्षण:
- हिमाचल की पारंपरिक नाटी और विभिन्न जिलों के लोक नृत्य।
- अन्य राज्यों के विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति।
- पारंपरिक वाद्ययंत्रों और पोशाकों का जीवंत प्रदर्शन।
SFI विश्वविद्यालय इकाई के सचिव मुकेश और अध्यक्ष योगी ने संयुक्त बयान में कहा कि यह आयोजन छात्रों के बीच एक स्वस्थ और लोकतांत्रिक माहौल को जिंदा रखने का काम करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों ने इस उत्सव को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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