हिमालयन डॉन, शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित पंचायतीराज चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंचायत चुनाव के लिए 30 चुनाव चिह्न निर्धारित किए हैं, जिनके आधार पर प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगे। चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उम्मीदवार को अपनी पसंद का चुनाव चिह्न चुनने की अनुमति नहीं होगी। सभी चिह्न तय नियमों के अनुसार सीरियल वाइज आवंटित किए जाएंगे।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की अंतिम तिथि पूरी होने के बाद ही प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। यह जिम्मेदारी संबंधित सहायक निर्वाचन अधिकारी की होगी, जो नियमों के तहत निष्पक्ष तरीके से चिह्न बांटेंगे। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से चुनाव में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की संभावनाएं कम होंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी चुनावी हलचल
चुनाव चिह्नों के आवंटन के साथ ही प्रदेश की पंचायतों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। फिलहाल कई पंचायतों में प्रधान और उपप्रधान पद के लिए 8 से 10 तक दावेदार सक्रिय हैं। गांवों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और कई जगह सहमति बनाने के प्रयास भी जारी हैं।
सोशल मीडिया पर भी संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। खासकर युवा वर्ग पंचायत प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद चुनाव में बढ़-चढ़कर दावेदारी पेश कर रहा है। इससे पंचायत चुनाव को लेकर गांव-गांव में माहौल गर्माने लगा है।
देवनागरी में जारी होगी प्रत्याशियों की सूची
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी है। नामांकन पत्रों के आधार पर तैयार प्रत्याशियों की सूची हिंदी (देवनागरी लिपि) में वर्णानुक्रम से प्रकाशित की जाएगी। सूची में उम्मीदवारों के नाम, पता और संबंधित जानकारी शामिल होगी, ताकि मतदाता आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें।
एजेंट नियुक्ति के नियम भी स्पष्ट
चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को एजेंट नियुक्त करने की सुविधा भी दी गई है। नियम 43 के तहत कोई भी प्रत्याशी चुनाव एजेंट नियुक्त कर सकता है। इसके लिए फार्म-25 में नामांकन के समय या चुनाव से पहले किसी भी समय नियुक्ति की जा सकती है।
नियम 44 के अनुसार, प्रत्याशी या उसका चुनाव एजेंट प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए एक पोलिंग एजेंट नियुक्त कर सकता है। इसके लिए फार्म-26 में दो प्रतियों में लिखित नियुक्ति देनी होगी। हालांकि, नियुक्त व्यक्ति अधिनियम के तहत अयोग्य नहीं होना चाहिए।
वहीं, मतगणना प्रक्रिया के लिए भी आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नियम 45 के तहत प्रत्याशी या उसका चुनाव एजेंट काउंटिंग एजेंट नियुक्त कर सकता है। इसके लिए फार्म-27 का उपयोग करना होगा। काउंटिंग एजेंट को मतगणना के दिन अधिकृत अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
पारदर्शी चुनाव की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय की गई यह प्रक्रिया पंचायत चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही गांवों में राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है, जिससे इस बार पंचायत चुनाव बेहद रोचक होने के आसार है।
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