शिमला: हिमाचल प्रदेश के पर्यटन और परिवहन क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। केरल के कोच्चि में आयोजित ‘अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद’ (IWDC) की तीसरी बैठक में हिमाचल प्रदेश सरकार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
धार्मिक पर्यटन सर्किट पर मुख्य फोकस
इस समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच पर्यावरण-अनुकूल रिवर क्रूज और धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा।
- सतलुज नदी (NW-98): तत्तापानी और नैना देवी (हिमाचल) को आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब (पंजाब) से जोड़ने की योजना है। इसकी व्यवहार्यता जांच (Feasibility Study) जारी है।
- रावी नदी (NW-84): रणजीत सागर बांध से चमेरा बांध तक रिवर क्रूज चलाया जाएगा। इसकी पहली जेटी (Jetty-1) का निर्माण जनवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने उठाई विशेष मांग
बैठक में हिमाचल के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने राज्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की अधिकांश प्रमुख नदियाँ हिमाचल से निकलती हैं, इसलिए राष्ट्रीय जलमार्ग ढांचे में हिमाचल एक प्रमुख हितधारक है।
उन्होंने केंद्र सरकार से दो प्रमुख मांगें रखीं:
- हाइड्रो-इलेक्ट्रिक कैटामारन: पहाड़ी पारिस्थितिकी को देखते हुए उन्होंने प्रदूषण मुक्त बिजली से चलने वाले कैटामारन जहाजों की मांग की।
- वित्तीय व तकनीकी सहायता: जलमार्गों के त्वरित विकास के लिए केंद्र से अधिक सहयोग का आग्रह किया।
बैठक की मुख्य विशेषताएं
- अध्यक्षता: केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की।
- आयोजन स्थल: यह बैठक पानी के बीच क्रूज पोत “इंपीरियल क्लासिक” पर आयोजित की गई।
- उद्देश्य: जल-आधारित बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को लाभ
यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि सड़क मार्ग पर दबाव कम करेगी। ‘हाइड्रो-इलेक्ट्रिक’ जहाजों का उपयोग हिमाचल की संवेनदनशील पहाड़ियों के लिए पर्यावरण की दृष्टि से सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
