नाहन। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र (आंजभोज) के टॉंरु गांव में ग्रामीणों ने मिलकर सामाजिक कुरीतियों और शादियों में होने वाली फिज़ूलखर्ची के खिलाफ एक बड़ी जंग छेड़ी है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर शादियों में शराब परोसने और अन्य भारी खर्चों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सार्वजनिक निर्णय लिया है।
प्रमुख निर्णय: जो बदलेंगे समाज की तस्वीर
गांव के बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने मिलकर निम्नलिखित कड़े नियम लागू किए हैं:
- शराब पर पूर्ण प्रतिबंध: शादी समारोहों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शराब परोसने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। गांव में शराब की बिक्री भी प्रतिबंधित रहेगी।
- उपहारों के लेन-देन पर रोक: लड़के की शादी में महिलाओं को दिए जाने वाले उपहार (घी, शक्कर, चीनी, सिक्के, कपड़े, बर्तन आदि) अब पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।
- सीमित ‘पलटोज’ पार्टी: शादी के बाद होने वाली ‘पलटोज’ पार्टी अब केवल 4-5 मुख्य नजदीकी परिवारों तक ही सीमित रहेगी।
- डीजे (DJ) के नियमों में बदलाव: पहले तीन दिनों तक चलने वाला डीजे अब केवल विवाह के मुख्य दिन, वह भी सीमित और नियंत्रित स्तर पर बजेगा।
- भोज और परंपराओं में कटौती: * गांव में ‘बकरा देने’ की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
- मृत्यु होने पर ‘शोक और बरसी’ के कार्यक्रम केवल सीमित परिवार तक ही रहेंगे।
- शोक के समय गांव के हर परिवार के बजाय केवल एक ही ‘पड़ाई’ (कफन) लाया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
ग्रामीणों का मानना है कि अमीरों की देखा-देखी में गरीब लोग भी दिखावे के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे थे। एक शादी में शराब पर ही 1 से 2 लाख रुपये खर्च हो जाते थे, जिससे परिवार जीवनभर कर्ज के बोझ तले दब जाते थे। इन नियमों का उद्देश्य समाज में सादगी, समानता, अनुशासन और भाईचारे को बढ़ावा देना है।
एक संदेश: टॉंरु गांव की यह पहल क्षेत्र की अन्य 11 पंचायतों के लिए एक मिसाल है। यह साबित करता है कि अगर समाज जागरूक हो जाए, तो पुरानी रूढ़ियों को तोड़कर एक बेहतर भविष्य की नींव रखी जा सकती है।
